यूपी कफ सिरप मामला: पूर्व सपा नेता गिरफ्तार, सीएम योगी ने अखिलेश यादव के साथ दिखाई थी तस्वीर

UP Cough Syrup Case: यूपी में कफ सिरप मामले बड़ी गिरफ्तारी हुई है. पुलिस के मुताबिक कफ सिरप के अवैध कारोबार के मास्टरमाइंड का नजदीकी अमित यादव को गिरफ्तार किया है. यूपी एसटीएफ ने उसे वाराणसी से हिरासत में लिया. वह समाजावदी पार्टी की यूथ विंग का सचिव रह चुका है.

UP Cough Syrup Case: उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की लखनऊ यूनिट ने कोडीन मिली कफ सिरप के अवैध भंडारण और तस्करी के मामले में वाराणसी से एक व्यक्ति को पकड़ा है. अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई शनिवार को हरहुआ रिंग रोड के पास की गई. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान वाराणसी के मैदागिन इलाके में रहने वाले अमित यादव के रूप में हुई है. 

एसटीएफ के अधिकारियों ने बताया कि अमित यादव के खिलाफ लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में पहले से कफ सिरप की तस्करी का मामला दर्ज था. इसकी वजह से वह काफी समय से फरार चल रहा था. पुलिस की पूछताछ में अमित यादव ने बताया कि वह हरिश्चंद्र पोस्टग्रेजुएट कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुका है और समाजवादी पार्टी की युवा सभा में राज्य सचिव की जिम्मेदारी भी निभा चुका है.

एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार, अमित ने स्वीकार किया कि कॉलेज के दिनों में अमित की मुलाकात शुभम जायसवाल नाम के युवक से हुई थी. शुभम के पिता भोला प्रसाद की कंपनी ‘शैली ट्रेडर्स’ पर एबॉट कंपनी की ‘फेंसेडिल’ कफ सिरप की अवैध सप्लाई और तस्करी में शामिल होने का आरोप है. बताया जाता है कि इस तरह की कोडीनयुक्त कफ सिरप का नशे के तौर पर इस्तेमाल होता है और इसकी मांग पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश जैसे इलाकों में ज्यादा रहती है.

पुलिस के मुताबिक ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में अमित यादव ने शुभम के कहने पर अपनी कंपनी ‘जीएल सर्जिकल’ के नाम से एक लाख से ज्यादा बोतलें खरीदीं. बाद में इन बोतलों को किसी दूसरी कंपनी के नाम पर कागजों में दिखाकर ऊंचे दामों पर बेच दिया गया.

अधिकारियों ने यह भी बताया कि अमित यादव के खिलाफ पहले से दंगा, हत्या की कोशिश और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं. फिलहाल पुलिस पूरे प्रदेश में कोडीनयुक्त कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है.

इस मामले का राजनीतिक पहलू भी सामने आया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि सरकार के पास नकली दवाओं या कोडीन सिरप से मौत की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है. 

उन्होंने तस्वीरें दिखाकर दावा किया था कि इस मामले में शामिल कुछ आरोपियों के संबंध समाजवादी पार्टी से जुड़े पाए गए हैं. उन्होंने कहा था कि एक आरोपी अमित यादव को अखिलेश यादव के साथ देखा गया था. सीएम योगी ने यह भी कहा था कि कथित मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल भी सपा से जुड़ा हुआ था और अमित का कारोबारी साझेदार था.

नशे में इस्तेमाल और तस्करी का जाल

कोडीन एक नियंत्रित दवा है, जिसे गंभीर खांसी के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन जांच में सामने आया कि इसी दवा का बड़े पैमाने पर नशे के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा था. उत्तर प्रदेश से इसकी खेप बिहार, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि बांग्लादेश तक भेजी जा रही थी, जहां इसकी काफी मांग बताई जा रही है.

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क्या है यूपी का कोडीन कफ सीरप केस?

मध्य प्रदेश में कफ सिरप के सेवन से कम से कम 20 बच्चों की मौत हुई. इसके बाद मामला और गंभीर हो गया है.  जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश की कुछ दवा कंपनियों से जुड़े हो सकते हैं. उत्तर प्रदेश की जांच एजेंसियों ने भी इस मामले में जांच शुरू की. जांच में खुलासा हुआ है कि करीब 57 करोड़ रुपये की 37 लाख से ज्यादा कोडीन कफ सिरप की बोतलें, फर्जी कागजात और नकली लाइसेंस के सहारे बेची गईं. यूपी पुलिस के मुताबिक यह पूरे पूरे सिंडिकेट का कारोबार लगभग 2,000 करोड़ रुपये है. यह पूरी तरह नशीली दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़ा है. 

इस पूरे खुलासे की शुरुआत 18 अक्टूबर को सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज से हुई. आबकारी विभाग ने राजस्थान और महाराष्ट्र नंबर के दो संदिग्ध कंटेनरों को रोका. ऊपर से देखने पर उनमें नमकीन और चिप्स के पैकेट लदे नजर आए, लेकिन तलाशी लेने पर चिप्स के नीचे 11,967 बोतलें ‘ESKUF’ नाम की कोडीन कफ सिरप की बरामद हुईं.

आरोप है कि इस नेटवर्क में नेता, माफिया और रसूखदार लोग शामिल हैं. जांच में सामने आया कि वाराणसी का एक छोटा-सा मेडिकल सप्लायर देखते-ही-देखते नशे के बड़े कारोबार का सरगना बन गया और उसके तार दुबई तक फैल गए. इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल बताया जा रहा है, जो फिलहाल फरार है और दुबई से खुद को निर्दोष बताते हुए वीडियो जारी कर चुका है.

शुभम के कई सहयोगी, जिनमें अमित सिंह ‘टाटा’ और आलोक सिंह शामिल हैं, गिरफ्तार किए जा चुके हैं. इस मामले में पूर्वांचल के एक बाहुबली नेता का भी नाम सामने आया था. इसी नेता के रसूख का इस्तेमाल करते हुए शुभम जायसवाल ने अपना अवैध कारोबार इतना बड़ा किया.

जांच और आगे की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी गठित की गई है और ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही है. अब तक कई जिलों में एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं. कोडीन मिली कफ सिरप के अवैध कारोबार को लेकर जांच एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस के एक पूर्व सिपाही, दवा बनाने वाली कंपनियों, सप्लायरों और कुछ अधिकारियों से पूछताछ की है.

इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कई ठिकानों पर छापे मारे थे, जहां गैरकानूनी कफ सिरप से जुड़े सबूत मिलने की बात कही गई है. इस मामले में अब तक 77 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. 

यूपी सरकार का कहना है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा. इसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में सरकार की लापरवाही साफ नजर आती है और समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए. 

विपक्ष का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बावजूद प्रशासन ने पहले पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे सवाल खड़े हो रहे हैं. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि पकड़े गए लोगों के संबंध समाजवादी पार्टी से हैं. इस पर अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष को निशाना बना रही है और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही.

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लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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