Supreme Court On Judicial Delay: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज करते हुए कहा, “मुकदमा 2015 में दायर हुआ था. 2026 तक भी वादी के साक्ष्य दर्ज किए जा रहे हैं. हम इतना ही कह सकते हैं कि मुकदमे की रफ्तार पर तो घोंघा भी सवाल उठा सकता है.”
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की दलील खारिज कर दी
सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की यह दलील भी खारिज कर दी कि जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई है, उनकी प्रासंगिकता पर विचार किया जाना चाहिए. अदालत ने कहा कि जिन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लाने की मांग की गई, वे मुकदमा दायर होते समय भी कंपनी के पास थे और बाद में अतिरिक्त साक्ष्य पेश किए जाने के समय भी उसके पास थे. पीठ ने कहा, “अगर इस आवेदन को मंजूर किया जाता है तो इसका मतलब होगा कि अदालत वाणिज्यिक मुकदमों में टुकड़ों-टुकड़ों में कार्यवाही करने के तरीके को स्वीकार कर रही है.” पीठ ने यह भी कहा कि इससे पहले एक बार अतिरिक्त साक्ष्य रिकॉर्ड पर लाने की अनुमति दी जा चुकी है.
कोर्ट ने कहा- जल्द फैसला किया जाए
अदालत ने कहा कि दस्तावेज कंपनी के पास पहले से मौजूद थे और इन्हें शुरुआत में ही या कम से कम उस समय पेश कर देना चाहिए था, जब पहली बार अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने के लिए आवेदन किया गया था. पीठ ने कहा कि 30 जनवरी 2018 को अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने का पहला आवेदन मंजूर कर लिया गया था, लेकिन उसी आधार पर दूसरा आवेदन नवंबर 2023 में दायर किया गया. अपील खारिज करते हुए पीठ ने निर्देश दिया कि जितनी जल्दी संभव हो, इस मुकदमे पर फैसला किया जाए.
2015 में दर्ज किया गया था मामला
यह मुकदमा मई 2015 में दायर किया गया था, बाद में जनवरी 2018 में इसे वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 के तहत वाणिज्यिक मुकदमे के रूप में दर्ज किया गया. दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंबित मुकदमे में कुछ अतिरिक्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर लाने और एक गवाह को दोबारा जिरह के लिए बुलाने की कंपनी की अर्जी खारिज कर दी थी.
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