पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. बनर्जी की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान पेश हुए. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोर्ट को बताया गया है कि सिर्फ सूची जारी करना ही सूचना देने का तरीका नहीं है, बल्कि संबंधित लोगों को अलग-अलग नोटिस भी भेजे जा रहे हैं.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वह इसी राज्य से हैं और बेंच की संवेदनशीलता के लिए आभार जताया. ममता ने कहा कि जब न्याय बंद दरवाजों के पीछे रोता है, तो लगता है कि कहीं भी इंसाफ नहीं मिल रहा. उन्होंने कोर्ट को बताया कि चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे जा चुके हैं. खुद को “बंधुआ मजदूर” बताते हुए उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े मुद्दे और लोगों के हक के लिए लड़ रही हैं.
हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा : मुख्यमंत्री बनर्जी
मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा, मैंने निर्वाचन आयोग को कई पत्र लिखे. निर्वाचन आयोग आधार कार्ड स्वीकार नहीं कर रहा है और मतदाता सूची संशोधन के लिए मतदाताओं से अन्य दस्तावेज भी मांग रहा है.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची व जस्टिस विपुल एम. पंचोली शामिल थं. वे मामले की सुनवाई कर रहे थे.
28 जनवरी को दायर की गई थी याचिका
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह याचिका 28 जनवरी को दायर की थी. इस मामले में उन्होंने निर्वाचन आयोग (ईसी) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्ष बनाया था. बनर्जी ने इससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को पत्र लिखकर चुनाव से पहले राज्य में जारी “मनमाने और खामियों से भरे” एसआईआर को रोकने का आग्रह किया था.
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को विभिन्न निर्देश जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए.
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ममता ने कविताओं के माध्यम से किया एसआईआर का विरोध
एसआईआर के खिलाफ जारी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध का एक अनूठा रूप अपनाया और इस मुद्दे पर 26 कविताएं लिखी हैं. बनर्जी ने ‘एसआईआर: 26 इन 26’ नामक पुस्तक लिखी है जिसमें ‘पैनिक’ (घबराहट), ‘डूम’ (विनाश), ‘मॉकरी’ (उपहास), ‘फाइट’ (लड़ाई), ‘डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र) और ‘हू इज टू ब्लेम’ (दोष किसे दें) शीर्षक वाली कविताएं उल्लेखनीय हैं. इस पुस्तक का विमोचन 22 जनवरी को 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में हुआ.
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पुस्तक की प्रस्तावना में बनर्जी ने इसे ‘विनाशकारी खेल में अपनी जान गंवाने वालों’ को समर्पित किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगाल के लोगों पर ‘निरंतर भय का अभियान’ चलाया गया है. वह लिखती हैं कि ये कविताएं ‘प्रतिरोध की भावना’ से उत्पन्न होती हैं.
