Sambhal News: माता पार्वती की खंडित मूर्ति, 500 साल पुराना कुआं…संभल में खुदाई से क्या-क्या मिला?

Sambhal News: उत्तर प्रदेश का संभल पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा में है. पहले जामा मस्जिद में सर्वे को लेकर विवाद हुआ, अब एक और मंदिर की खोज हुई है, जो 46 साल से बंद था. मंदिर परिसर की खुदाई की जा रही है, जिसमें कई ऐतिहासिक चीजें मिली हैं.

Sambhal News: संभल के डीएम डॉ राजेंद्र पेंसिया ने बताया, “मंदिर के पास एक ‘कूप’ (कुआं) मिला है. इसे 400-500 साल पुराना बताया जा रहा है. रविवार को करीब 10-12 फीट खुदाई की गई थी. आज 5-6 फीट और खुदाई करने पर माता पार्वती की एक खंडित मूर्ति मिली. उसके बाद दो और मूर्तियां मिलीं हैं. यहां बहुत सारे कुएं हैं जो अज्ञानता या अतिक्रमण के कारण दब गए हैं. हमने वैज्ञानिक जांच के लिए एएसआई को लिखा है. हमारी टीम पिछले 2 हफ्तों से खुदाई कर रही है और एक-एक करके चीजें बरामद हो रही हैं. मैं लोगों से अनुरोध करता हूं कि अगर उन्हें कोई प्राचीन धरोहर मिले तो हमें सूचित करें.”

संभल खुदाई पर क्या बोले अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन

संभल मामले में हाल ही में हुए घटनाक्रम पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा, “संभल में जिला प्रशासन ने एक मंदिर की खोज की है जो 46 वर्षों से बंद था. यह सब साबित करता है कि हमारा प्राचीन नक्शा, जिसके बारे में मैंने हमेशा कहा था कि वह मौजूद है, खोजा गया है और यह साबित करता है कि संभल एक तीर्थ स्थल है. मंदिर के आसपास के क्षेत्र में कई कुएं और अन्य मंदिर पाए जा रहे हैं जो क्षेत्र के प्राचीन नक्शे को साबित करते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विष्णु शंकर ने क्या कहा?

12 दिसंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विष्णु शंकर ने कहा, कोर्ट का उस दिन का आदेश यहां लागू नहीं होता, क्योंकि इसमें कहा गया था कि मौजूदा मुकदमों में कोई प्रभावी आदेश पारित नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा. मैं 12 दिसंबर के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से संतुष्ट नहीं हूं. हमने पूजा स्थल अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी, हमें उम्मीद थी कि इस पर सुनवाई होगी, लेकिन हमें पता चला कि AIMPLB ने पूजा स्थल अधिनियम को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी एक आवेदन दायर किया था. हमें नहीं पता था कि उनके आवेदन पर एक अंतरिम आदेश तुरंत पारित किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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