इंडियाज गॉट लेटेंट में समय रैना और शेरोन वर्मा के बीच क्या हुआ, जिससे बिहारी-कश्मीरी पर छिड़ा विवाद?

Samay Raina के India’s Got Latent के वायरल क्लिप ने एक बार फिर कॉमेडी की सीमा और सामाजिक जिम्मेदारी पर बहस छेड़ दी है. जानिए बिहार और कश्मीर को लेकर पूरा विवाद क्या है.

मजाक की भी कोई सीमा होनी चाहिए या नहीं? अगर नहीं, तो क्या सिर्फ इसलिए कि मंच कॉमेडी का है, कोई संदर्भ, शब्द या किसी मुद्दे पर कुछ भी बोला जा सकता है? और क्या उसे सिर्फ मजाक कहकर जिम्मेदारी से बचा जा सकता है?

यह सवाल एक बार फिर से सोशल मीडिया पर खूब उछल रहा है. दरअसल, कॉमेडियन समय रैना एक बार फिर चर्चा में हैं और इस बार फिर से वजह है उनका शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’. शो के एक वायरल वीडियो क्लिप को लेकर विवाद शुरू हुआ है. यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राजनीतिक नेताओं ने भी इस पर आपत्ति जताई है.

आखिर वीडियो में ऐसा क्या कहा गया कि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बात पहुंच गई?

शेरोन वर्मा और समय रैना के बीच क्या हुआ?

दरअसल, शो के दौरान समय रैना ने शेरोन वर्मा के बिहारी होने को लेकर मजाक किया.

  • रैना ने कहा कि शेरोन इतनी बिहारी हैं कि उन्हें लगता है कि ‘इबोला’ का मतलब होता है कि किसी ने कुछ कहा, यानी ‘बोला’.
  • इसके जवाब में शेरोन वर्मा ने समय रैना के कश्मीरी होने को लेकर ‘स्टोन’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए पलटवार किया. शेरोन ने कहा, “समय इतना कश्मीरी है कि उसे ‘स्टोन’ (नशे में धुत होना) होना पसंद है. यह यहीं तक नहीं रूका.
  • इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और समय रैना ने शोरोन को लेकर कहा कि “शेरोन वर्मा एक बिहारी है जो नौकरी की तलाश में मुंबई आई थीं और बिहारी अक्सर ऐसा करते हैं.”
  • इस पर शेरोन ने इसका जवाब देते हुए कहा कि कम से कम उन्होंने अपना राज्य अपनी मर्जी से छोड़ा है.

बातचीत का यह हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. देखिए वीडियो..

सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

  • वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है. वीडियो शेयर करते हुए यूजर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
  • कुछ यूजर्स ने इसे दो कॉमेडियनों के बीच होने वाला सामान्य रोस्ट बता रहे हैं. उनका कहना था कि दोनों एक-दूसरे पर मजाक कर रहे थे और बातचीत का संदर्भ कॉमेडी तक सीमित है.
  • जबकि कुछ लोगों ने बिहार और कश्मीर से जुड़े इन संदर्भों को संवेदनशील बता रहे हैं.
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नेताओं ने भी जताई आपत्ति

यह विवाद इतना बढ़ गया कि आम यूजर के अलावा, कई राजनेताओं की भी प्रतिक्रियाएं सामने आईं हैं.

  • बीजेपी विधायक राम कदम ने कश्मीरी पंडितों और धार्मिक भावनाओं को मजाक का विषय बनाए जाने पर आपत्ति जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विवादित बयान देकर प्रचार हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
  • शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने भी समय राणा की आलोचना की. उन्होंने कहा कि कॉमेडी अपनी जगह है, लेकिन जाति, राज्य और धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों को मजाक में शामिल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए.
  • बिहार सरकार में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस तरह की टिप्पणियों को लेकर को लेकर कहा कि किसी समुदाय, राज्य या व्यक्ति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती.
  • शिवसेना नेता संजय निरुपम ने बिहार को लेकर की गई टिप्पणी पर असहमति जताई. उन्होंने कश्मीर से जुड़े मजाक को भी ठीक नहीं माना. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह एक कॉमेडी का कार्यक्रम था और दोनों को माफ कर देना चाहिए.

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क्या कॉमेडी में भी होनी चाहिए एक सीमा?

इस विवाद ने एक बार फिर कॉमेडी की आजादी और कॉमेडियन की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है. कॉमेडी का मकसद लोगों को हंसाना और गंभीर मुद्दों को हल्के अंदाज में पेश करना हो सकता है, लेकिन जब मजाक किसी राज्य, समुदाय या लोगों की पहचान से जुड़ता है तो उसका असर अलग होता है. जैसा इस मामले में देखने को मिल रहा है.

समय राणा और शेरोन वर्मा के बीच हुई बातचीत को कुछ लोग सिर्फ रोस्ट मान रहे हैं, जबकि कुछ लोगों को लगता है कि ऐसे विषयों पर कॉमेडियन को थोड़ा संभलकर बोलना चाहिए.



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By गौतम कुमार

गौतम कुमार वर्तमान में प्रभात खबर से जुड़े पत्रकार हैं. वे राजनीति, इतिहास, साहित्य, खेल, कानून, लोक संस्कृति और मनोरंजन जैसे विविध विषयों पर लिखते हैं. किसी विषय पर रिपोर्टिंग या लेखन के दौरान उनका जोर केवल घटनाओं की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की पृष्ठभूमि, सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ और उसके प्रभाव को समझाने पर रहता है.

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किताबों, फिल्मों और कहानियों में उनकी विशेष रुचि है. वे मानते हैं कि अच्छी किताब या अच्छी फिल्म मिलने के बाद बाकी दुनिया कुछ देर इंतजार कर सकती है. यही रुचि उनके लेखन में भी दिखाई देती है, जहां वे खबर और घटनाओं के पीछे छिपी कहानी को समझने और पाठकों के सामने उसे सरल और संदर्भपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश करते हैं.

गौतम कुमार मानते हैं कि किसी विषय पर राय अलग हो सकती है और नजरिया भी अलग हो सकता है, लेकिन सार्थक संवाद की शुरुआत इन्हीं अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने से होती है. इसलिए पाठकों की राय, सुझाव और विचार उनके लिए महत्वपूर्ण हैं. उनसे सोशल मीडिया के माध्यम से भी जुड़ा जा सकता है.

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