Road Accident: स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो सकता है सड़क सुरक्षा

सरकार की कोशिश सड़क सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की है. ताकि बच्चों को सड़क सुरक्षा के बारे में संवेदनशील बनाया जा सके.

Road Accident: देश में हर साल लाखों लोगों को सड़क हादसे में जान गंवानी पड़ती है. हादसों को रोकने के लिए सरकार कई स्तर पर प्रयास कर रही है. सड़कों की डिजाइन बेहतर करने, डार्क स्पॉट की पहचान कर उसे दूर करने, ट्रैफिक नियमों को सख्त बनाने के अलावा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन अब सरकार की कोशिश सड़क सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की है. ताकि बच्चों को सड़क सुरक्षा के बारे में संवेदनशील बनाया जा सके. इस बाबत बुधवार को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की. इस दौरान सड़क सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया गया. 

बैठक की जानकारी देते हुए परिवहन मंत्री गडकरी ने कहा कि वर्ष 2023 में स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के पास सड़क हादसे में 11 हजार से अधिक युवाओं को जान गंवानी पड़ी. सबसे दुखद बात है कि जान गंवाने वाले अधिकांश युवा 18 साल से कम उम्र के थे. यह आंकड़ा काफी भयावह है और इसपर तत्काल कार्रवाई करने की जरूरत है. गडकरी का मानना है कि स्कूली स्तर पर सड़क सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने से बच्चों में सड़क सुरक्षा को लेकर सोच पैदा करने में मदद मिलेगी और ऐसे युवा भविष्य में सड़क सुरक्षा को लेकर अधिक जागरूक होंगे. बच्चों में सड़क सुरक्षा की भावना मजबूत होने से परिवार के अन्य सदस्यों भी इसे लेकर अधिक संवेदनशील होंगे. 


भावी पीढ़ी को जागरूक करना जरूरी

नितिन गडकरी सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार प्रयास कर रहे हैं. उनका मानना है कि सड़क सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने से भावी पीढ़ी सड़क सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क होगी. सड़क सुरक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय तैयारी पूरी कर चुका है. गडकरी ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के साथ बैठक के दौरान स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के पास सड़क सुरक्षा के सख्त प्रोटोकॉल लागू करने, स्कूल बसों में सुरक्षा के तय मानक को सख्ती से लागू करने पर चर्चा की गयी. 

गौरतलब है कि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में हर रोज कम उम्र के 16 बच्चे सड़क हादसे का शिकार हो रहे है. इस मामले में तमिलनाडु सबसे आगे हैं. भारत में नियम के अनुसार 18 साल से कम उम्र के बच्चों के वाहन चलाने पर रोक है. लेकिन देखा गया है कि कई मामलों में कम उम्र के बच्चों के गाड़ी चलाने के कारण सड़क हादसा हुआ है. ऐसे में सरकार ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने के नियमों को भी सख्त बनाया है. 

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Published by: Anjani kumar singh

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