आशा सहयोगिनियों का मानदेय बढ़ा, राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला

इस वृद्धि के बाद आशा सहयोगिनियों का मानदेय 3564 से बढ़कर 4098 रुपए प्रतिमाह हो जाएगा जिससे उनके जीवनयापन में सुधार होगा. चुनाव के पहले राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने लिया ये फैसला

राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले प्रदेश की कांग्रेस सरकार कई तरह के फैसले ले रही है. इस क्रम में राजस्थान सरकार ने आशा सहयोगिनियों के मानदेय में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का फैसला किया है. इस बाबत एक सरकारी बयान जारी किया गया है जिसके अनुसार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की 55816 आशा सहयोगिनियों के मानदेय में 15 प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.

आपको बता दें कि राजस्थान में मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में आंगनबाड़ी केन्द्रों की अहम भूमिका है. आंगनबाड़ी कर्मियों को संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने कई फैसले किये हैं. इसी के तहत मुख्यमंत्री गहलोत ने उपरोक्त फैसला किया है. इस वृद्धि के बाद आशा सहयोगिनियों का मानदेय 3564 से बढ़कर 4098 रुपए प्रतिमाह हो जाएगा जिससे उनके जीवनयापन में सुधार होगा. सीएम अशोक गहलोत के इस फैसले से राज्य सरकार पर 35.76 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा.

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उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा 2023-24 के बजट में इस संबंध में घोषणा की गयी थी. एक अन्य फैसले के तहत सरकार ने राज्य के 10 मंदिरों, तीन किलों एवं दो महत्वपूर्ण स्मारकों में 50.40 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्य कराने के प्रस्ताव को मंजूरी देने का काम किया है.

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Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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