Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से आठ दिन पहले 29 अप्रैल को एक अहम बैठक हुई थी. पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बताया कि इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता दी थी. साथ ही उन्होंने साफ कहा था कि ऑपरेशन अपने समय पर किया जाए, लेकिन विफलता की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.
24 अप्रैल को PM मोदी ने साफ कर दिया था रुख
जनरल अनिल चौहान ने दिल्ली के विवेकानंद केंद्र में बताया कि 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटना में अपने भाषण के दौरान राजनीतिक रुख साफ कर दिया था. उन्होंने कहा था कि आतंकी हमले के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और भारत सीमा पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा.
23 से 29 अप्रैल के बीच हुईं कई बैठकें
चौहान के मुताबिक 23 अप्रैल को कूटनीति, आर्थिक शक्ति और व्यापार से जुड़े फैसले लिए गए थे. इसके बाद 23 से 29 अप्रैल के बीच कई बैठकें हुईं. इन बैठकों में सेना ने सरकार के सामने अलग-अलग विकल्प रखे. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ भी इन विकल्पों पर चर्चा की गई.
29 अप्रैल की बैठक क्यों थी अहम?
29 अप्रैल को चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी, रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. चौहान के मुताबिक इस बैठक में बड़ा फैसला यह था कि पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया जाए, क्योंकि भारत सीमा पार आतंकवाद को स्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि सेना के पास कई विकल्प थे और इन पर सरकार के साथ लगातार चर्चा हुई थी.
PM मोदी ने सेना से क्या कहा था?
जनरल चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर को तुरंत शुरू करने का कोई राजनीतिक दबाव नहीं है. उन्होंने सेना से कहा कि कार्रवाई अपने समय पर की जाए, लेकिन यह तय किया जाए कि मानवीय या तकनीकी किसी भी वजह से विफलता न हो. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि जो भी कार्रवाई की जाए, उसका सबूत होना चाहिए.
सेना को मिली पूरी कार्रवाई की आजादी
चौहान के मुताबिक प्रधानमंत्री की ओर से सेना को पूरी तरह से कार्रवाई की स्वतंत्रता दी गई थी. उन्होंने कहा कि सेना के लिए इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता था, क्योंकि सैन्य नेतृत्व को साफ और स्पष्ट राजनीतिक दिशा की जरूरत होती है और इस मामले में वह दिशा उपलब्ध थी.
7 मई को शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इसका मकसद पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे को तबाह करना था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी. ऑपरेशन का उद्देश्य उन आतंकी ठिकानों को निशाना बनाना था, जिनका इस्तेमाल हमले की योजना बनाने में किया गया था.
10 मई को रोका गया अभियान
भारतीय हमलों में कई अहम आतंकी लॉन्चपैड तबाह हो गये थे. इसके बाद पाकिस्तानी पक्ष के औपचारिक अनुरोध पर 10 मई को ऑपरेशन रोक दिया गया था.
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