NCRB Report : महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4 लाख से अधिक मामले दर्ज, बंगाल में एसिड अटैक की सबसे अधिक घटनाएं

NCRB के अनुसार देश में वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध की 428278 मामले दर्ज हुए जबकि वर्ष 2020 में इसकी संख्या 371503 थी. वहीं वर्ष 2019 में यह 405326 थी.

Crime against women in India : तमाम दावों, प्रतिदावों और कानूनों के बावजूद देश में महिलाओं के प्रति अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जो ना सिर्फ चिंता की बात है बल्कि देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है. एनसीआरबी (राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है.

महिलाओं के खिलाफ अपराध की चार लाख से अधिक घटनाएं

NCRB के अनुसार देश में वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ अपराध की 428278 मामले दर्ज हुए जबकि वर्ष 2020 में इसकी संख्या 371503 थी. वहीं वर्ष 2019 में यह 405326 थी. यह केस आईपीसी और स्पेशल लाॅ एक्ट के तहत दर्ज हुईं हैं. वर्ष 2020 में देश में लाॅकडाउन की स्थिति थी यही वजह है कि अपराध के मामले भी कम दर्ज हुए थे. लेकिन लाॅकडाउन समाप्त होने के बाद जिस राज्य में महिलाओं के खिलाफ सर्वाधिक अपराध के मामले दर्ज हुए उसमें नंबर एक पर उत्तर प्रदेश है, जहां 56083 मामले दर्ज हुए. वहीं दूसरे स्थान पर राजस्थान है, जहां 40738 केस दर्ज हुए.

बंगाल में अपराध का ग्राफ बढ़ा

तीसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल है जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध के 35884 केस दर्ज हुए. बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 17950 केस दर्ज हुए जबकि झारखंड में यह आंकड़ा 8110 है. वहीं 2020 में बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं 2021 से अधिक थी. कुल दर्ज केस 36439 थे.

एसिड अटैक की सबसे अधिक घटना बंगाल में

एसिड अटैक जैसा घृणित अपराध देश में सबसे ज्यादा 2021 में बंगाल में दर्ज हुआ. यहां कुल 30 मामले सामने आये और 30 महिलाएं एसिड अटैक की शिकार हुईं. देश में कुल 93 केस एसिड अटैक के सामने आये थे, जिनमें 98 महिलाएं पीड़ित हुईं थी. एसिड अटैक के मामले में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है, जहां 18 घटनाएं हुईं और 21 महिलाएं पीड़ित थीं. तीसरे स्थान पर असम है, जहां सात घटना हुई और 9 महिलाएं पीड़ित हुईं. चौथे स्थान पर गोवा और गुजरात हैं जहां छह-छह घटनाएं हुईं और पीड़ित थी इतनी ही महिलाएं हुईं. बिहार में एसिड अटैक की एक घटना सामने आयी और पीड़ित महिला भी एक ही थी जबकि झारखंड में वर्ष 2021 में एसिड अटैक का कोई मामला सामने नहीं आया था. अभी हाल ही में झारखंड के चतरा में एक लड़की और उसकी मां पर एसिड अटैक का मामला सामने आया है, लड़की को इलाज के लिए दिल्ली भेजा गया है.

पति द्वारा क्रूरता की घटनाएं

देश में पति द्वारा क्रूरता की कुल 136234 घटनाएं हुईं जिनमें पीड़िताओं की कुल संख्या 137956 थी. यानी प्रति लाख पर 20.3 महिलाएं पति की प्रताड़ना या क्रूरता का शिकार हुईं. पति द्वारा क्रूरता किये जाने का भी सबसे अधिक मामला पश्चिम बंगाल में सामने आया जहां 19952 मामले सामने आये और कुल 20052 महिलाएं पीड़ित हुईं. दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है जहां 18375 मामले सामने आये और कुल पीड़िता 18383 थीं. राजस्थान तीसरे स्थान पर है जहां कुल 16949 केस सामने आये और पीड़ितों की संख्या 16973 थी. झारखंड में कुल 931 केस सामने आये और 931 महिला पीड़ित थी, जबकि बिहार में 2069 मामले सामने आये और 2069 महिलाएं पीड़ित थीं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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