मुंबई लोकल ट्रेन में 22 वर्षीय युवक की चाकू मारकर हत्या, दरवाजा बंद करने को लेकर हुआ था विवाद

Mumbai News : मुंबई की लाइफ लाइन लोकल ट्रेन में एक 22 वर्षीय युवक की हत्या सोमवार को दरवाजा बंद करने के मुद्दे पर हुई है. इस घटना ने पूरे शहर को दहला दिया है.

Mumbai News : मुंबई की लोकल ट्रेन में सोमवार को एक मामूली विवाद में 22 वर्षीय एक युवक की चाकू मारकर हत्याकर दी गई. सोमवार की रात को चलती ट्रेन में दरवाजा बंद करने को लेकर कुछ लोग आपस में भिड़ गए. झगड़े के दौरान 22 वर्षीय युवक को चाकू मारा गया. यह घटना चर्चगेट-नालासोपारा फास्ट लोकल के प्रथम श्रेणी डिब्बे में अंधेरी और बोरीवली स्टेशनों के बीच हुई.

निजी कंपनी में सेल्समैन था मृतक

मृतक की पहचान विरार निवासी मयंक लोहार के रूप में हुई है, जो अंधेरी स्थित एक निजी कंपनी में सेल्समैन के तौर पर कार्यरत था. पुलिस के अनुसार, मयंक सोमवार रात काम से घर लौट रहा था और ट्रेन संख्या 90663 के फर्स्ट क्लास कोच में सफर कर रहा था. इसी दौरान भारी बारिश के कारण कोच का दरवाजा खुला होने पर उसने एक सहयात्री से दरवाजा बंद करने का अनुरोध किया. बताया जा रहा है कि इसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते तीखी नोकझोंक में बदल गई. आरोप है कि विवाद के दौरान आरोपी ने अपने पास मौजूद धारदार हथियार निकाल लिया और मयंक के पेट में वार कर दिया. गंभीर रूप से घायल मयंक ट्रेन में ही लहूलुहान होकर गिर पड़ा.

रेलवे पुलिस के मुताबिक, ट्रेन रात 11:04 बजे बोरीवली स्टेशन पहुंचने से पहले ही आरोपी प्लेटफॉर्म नंबर 6 के पास चलती ट्रेन से कूदकर फरार हो गया. घटना की सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) की टीम मौके पर पहुंची और घायल युवक को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई.

इलाज के दौरान हुई मयंक की मौत

मयंक को पहले बोरीवली स्टेशन के आपात चिकित्सा कक्ष में ले जाया गया, जहां प्राथमिक जांच के बाद उसे एंबुलेंस से कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बोरीवली जीआरपी ने हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है. पुलिस स्टेशन और रेलवे परिसरों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है तथा घटना के प्रत्यक्षदर्शियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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