Middle East Conflict : पीएम मोदी शुक्रवार (27 मार्च) शाम 6:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों से बात करेंगे. बैठक में वेस्ट एशिया की बदलती स्थिति (ईरान युद्ध की वजह से) पर चर्चा होगी. देखा जाएगा कि इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है, खासकर एलपीजी गैस और तेल की सप्लाई पर. सरकार यह भी जांचेगी कि देश इन हालात के लिए कितना तैयार है.
बैठक में प्रधानमंत्री इस बात पर जोर दे सकते हैं कि सभी मिलकर काम करें. “टीम इंडिया” की भावना के तहत केंद्र और राज्यों के बीच अच्छा तालमेल और सहयोग बना रहे, ताकि किसी भी स्थिति से मिलकर प्रभावी तरीके से निपटा जा सके. बैठक में इस पर भी बात हो सकती है कि अगर हालात अचानक बिगड़ें तो उससे निपटने के लिए पहले से क्या बैकअप प्लान तैयार रहें. साथ ही दुनिया में अनिश्चितता के बीच देश के अंदर शांति और स्थिरता कैसे बनाए रखी जाए.
इन राज्यों के सीएम बैठक में नहीं आएंगे
जिन राज्यों में अभी विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, वे आचार संहिता की वजह से इस बैठक में शामिल नहीं होंगे. उनके लिए अलग से कैबिनेट सचिवालय के जरिए मुख्य सचिवों के साथ बातचीत की जाएगी. ऐसा इसलिए ताकि तैयारी और जरूरी फैसलों में कोई रुकावट न आए और काम लगातार चलता रहे. इन राज्यों में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी शामिल है.
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चुनाव की घोषणा हो चुकी है इन राज्यों में
पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव की घोषणा 15 मार्च को की जा चुकी है. चुनाव आयोग ने घोषणा करते हुए कहा था कि चुनाव की मतगणना 4 मई को की जाएगी. यानी इन राज्यों के सीएम बैठक में शामिल नहीं होंगे.
एलपीजी की सप्लाई पर दबाव
यह खबर इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि भारत में एलपीजी (घरेलू गैस) की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है. कई जगह इसकी कमी महसूस हो रही है. दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से ही भारत की बड़ी मात्रा में गैस और तेल आता है, लेकिन युद्ध (ईरान-इजरायल-यूएस के बीच युद्ध) के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. हालांकि ईरान ने भारत को पूरी तरह नहीं रोका है, फिर भी इस स्थिति से चिंता बढ़ गई है. आने वाले समय में सप्लाई और मुश्किल हो सकती है और हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.
