Kalita Majhi West Bengal MLA: 4 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन हो गया है. 15 साल के राज के बाद टीएमसी राज्य की सत्ता से बाहर हो गई है. 5 मार्च के सूर्योदय के साथ भाजपा का कमल पूरा खिल गया है. इस बार जनता ने स्पष्ट आदेश दिया, जिसमें राजनीति ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी दिखा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आम, सताए हुए और ममता की सरकार से त्रस्त जनता ने अपने ही जैसे लोगों को विधायक बनाया है. ऐसी ही दिलचस्प और प्रेरणादायक जीत हुई है कलिता माझी की.
कोई भी पेशा छोटा नहीं होता. हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते, लेकिन समाज के कुछ अनकहे नियम हैं, जिसमें कुछ कामों को छोटा देखा जाता है. अपना घर चलाने के लिए दूसरे के घर शायद वही काम करते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों. पश्चिम बंगाल को लेकर चुनाव से पहले (हां केवल सोशल मीडिया पर ही) ऐसी धारणा बनाई गई कि इस राज्य की महिलाएं देश के अन्य हिस्सों में मेड (दूसरे के घरों में काम करने वाली) हैं. तो! बंगाल ने क्या किया? ऐसी ही कामगार को अपनी विधायक बना लिया.
टीएमसी कैंडिडेट को दी करारी शिकस्त
महज 2,500 रुपये महीने कमाने वाली एक घरेलू कामगार से विधायक बनने तक का उनका सफर चर्चा का विषय बना है. माझी ने आउसग्राम सीट से जीत दर्ज करते हुए 1,07,692 वोट हासिल किए और टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया. गुस्कारा नगरपालिका क्षेत्र की रहने वाली कलिता माझी राजनीति में आने से पहले चार घरों में घरेलू काम करती थीं. उनकी उम्मीदवारी शुरू से ही जमीनी जुड़ाव के कारण चर्चा में थी. सोशल मीडिया पर उनकी इस जीत, परिवार की स्थिति और संघर्ष की कहानी छाई हुई है. यह जीत साफ तौर पर सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक बड़ी मिसाल है.
बीजेपी सांसद बोले- ऐसा केवल हमारी पार्टी में संभव
बीजेपी के सांसद पीसी मोहन ऐसी जीत केवल अपनी पार्टी में ही संभव होना बताया. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘बीजेपी की बंगाल उम्मीदवार कलिता माझी, जो चार घरों में घरेलू काम करके महज 2,500 रुपये महीना कमाती हैं, ने आउसग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल की है. यह बीजेपी की उस ताकत को दर्शाता है, जहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी आगे बढ़कर एक प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है.’
पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं कलिता माझी
इससे पहले कलिता माझी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस के अभेदनंद ठाकुर से 11,815 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार फिर बीजेपी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया, जो सही साबित हुआ.
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बीजेपी की बड़ी जीत ने बदला बंगाल
बीजेपी की कलिता माझी के अलावा आरजी कर हॉस्पिटल की रेप पीड़िता ‘अभया’ की मां रत्ना देबनाथ, संदेशखाली में टीएमसी के स्ट्रांगमैन शाहजहां शेख की सताई हुई रेखा पात्रा ने भी जीत हासिल की है. जब बदलाव ऐसा है, तो जाहिर है भाजपा ने परिवर्तन जमीन पर उतार दिया है. राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीत लीं. इस जीत के साथ ही पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया.
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ममता भी हारीं अपनी सीट
1972 के बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की सरकार होगी. इस चुनाव में परिवर्तन का बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी हुआ. उन्हें भवानीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा. उन्हें बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने हरा दिया. पिछले चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, इस बार भवानीपुर में भी कमल खिल गया है. हालांकि, इस बड़े बदलाव के बीच कलिता माझी की कहानी खास है. रसोई में काम करने से लेकर विधानसभा तक पहुंचने का उनका सफर लोकतंत्र की ताकत और जनता की बदलाव की ताकत की मिसाल है.
