Yashwant Varma Resigns : यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर कथित तौर पर बेहिसाब नकदी मिलने के विवाद के करीब एक साल बाद यह फैसला उनकी ओर से लिया गया. 9 अप्रैल को राष्ट्रपति को भेजे इस्तीफे में जस्टिस यशवंत वर्मा ने लिखा कि वह कारणों का बोझ राष्ट्रपति पर नहीं डालना चाहते. उन्होंने कहा कि बेहद दुख के साथ वह तुरंत प्रभाव से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे रहे हैं और इस पद पर सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही है.
पिछले साल 14 मार्च 2025 को नई दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर जले हुए नोटों के बंडल मिले थे. इसके बाद उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया गया था.
वर्मा को काफी पहले दे देना चाहिए था इस्तीफा : बार एसोसिएशन
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के इस्तीफे पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को कहा कि उन्हें काफी पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि यशवंत वर्मा को इस्तीफा ही देना था तो काफी पहले दे देते… यह हम सभी के लिए बेहतर रहता. इससे झूठमूठ का विवाद पैदा होता रहा. इससे सभी की, हाई कोर्ट, पूरी न्यायपालिका और स्वयं उनकी भी छवि धूमिल हुई.
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राकेश पांडेय ने कहा कि अगर वह लड़ रहे थे तो उन्हें लड़ते रहना चाहिए था, और अगर इस्तीफा देना था तो इसे शुरू में ही दिया जा सकता था. उन्होंने अब जाकर इस्तीफा दिया है तो भी यह स्वागत योग्य कदम है… उन्होंने समझदारी का काम किया.
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