हैदराबाद: तेलंगाना के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय की गिरफ्तारी के विरोध में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ‘धर्म युद्ध’ का ऐलान कर दिया है. जेपी नड्डा ने तेलंगाना प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की गिरफ्तारी को अलोकतांत्रिक और गैरकानूनी करार दिया है. श्री नड्डा ने कहा कि भाजपा के लिए यह ‘धर्म युद्ध’ है.
उन्होंने कहा कि हम कानून की मदद से इस लड़ाई को लड़ेंगे. लोकतांत्रिक तरीके से हम इस लड़ाई को खत्म करेंगे. श्री नड्डा ने कहा कि इस लड़ाई में हम कानून का उल्लंघन बिल्कुल भी नहीं करेंगे. लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए और कानून का पालन करते हुए हम अपने प्रदेश अध्यक्ष की गिरफ्तारी का विरोध करते रहेंगे.
तेलंगाना बीजेपी के नेता बंदी संजय की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए हैदराबाद पहुंचे भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को ये बातें कहीं. उन्होंने कहा है कि पिछले दो दिनों से जो कुछ भी हो रहा है, वह तानाशाही है. उन्होंने कहा कि आज वह महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने गये थे. हमने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन किया.
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उन्होंने कहा कि तेलंगाना की सरकार सबसे अलोकतांत्रिक सरकार है. पिछले दो दिनों से जो कुछ भी प्रदेश में हो रहा है, वह लोकतंत्र की हत्या है. यहां तानाशाही चल रही है. उन्होंने कहा कि संजय बंदी के साथ मारपीट हुई. उसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. यह तेलंगाना में के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की अलोकतांत्रिक शासन का जीवंत उदाहरण है.
जेपी नड्डा ने कहा, ‘यह मेरा केसीआर पर आरोप है कि वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं. यह राज्य आज सबसे भ्रष्ट राज्य बन गया है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी बंदी संजय की गिरफ्तारी के खिलाफ आंदोलन जारी रखेगी, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी अलोकतांत्रिक तरीके से हुई है.
उल्लेखनीय है कि तेलंगाना बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को करीमनगर की पुलिस ने रविवार की शाम को एक प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार कर लिया था. करीमनगर में बंदी संजय कुमार तेलंगाना के शिक्षकों को पक्ष में प्रदर्शन कर रहे थे. उनकी मांग थी कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर विचार करे और उनकी समस्याओं का समाधान करे.
भाजपा अध्यक्ष श्री नड्डा ने कहा कि बंदी संजय कुमार शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे थे. पुलिस ने उनके साथ जबर्दस्ती की और गलत तरीके से उन्हें गिरफ्तार किया. संजय कुमार को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस जबरन उनके दफ्तर में दाखिल हुई. उनके साथ बदतमीजी हुई. उनके साथ धक्का-मुक्की की गयी. यह गलत है. अलोकतांत्रिक है.
Posted By: Mithilesh Jha
