Jagdeep Dhankhar : जगदीप धनखड़ ने नई बुलेटप्रूफ गाड़ियों की मांग की थी, जानें कहां अटक गई थी बात

Jagdeep Dhankhar : जगदीप धनखड़ ने फरवरी में गृह मंत्रालय से नई बुलेटप्रूफ गाड़ियों की मांग की थी. लेकिन प्रक्रिया रुकी रहने पर उन्होंने सामान्य इनोवा गाड़ी का इस्तेमाल किया. उपराष्ट्रपति को दिल्ली पुलिस द्वारा Z-Plus सुरक्षा कवर मिलता है. 28 नवंबर को दिल्ली पुलिस ने एक आंतरिक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि उपराष्ट्रपति सचिवालय ने धनखड़ की बुलेटप्रूफ गाड़ियों को बदल दिया है.

Jagdeep Dhankhar : पिछले साल फरवरी में उपराष्ट्रपति सचिवालय ने तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के लिए नई बुलेटप्रूफ गाड़ियों की मांग की थी, क्योंकि उनकी तीन हाई-सिक्योरिटी बीएमडब्ल्यू कारें पुरानी हो चुकी थीं. गृह मंत्रालय (MHA) ने जून में जानकारी दी कि इस मामले की समीक्षा के लिए एक पैनल बनाया जाएगा. हालांकि, नवंबर तक कोई निर्णय नहीं हो सका. इसके बाद उपराष्ट्रपति कार्यालय ने बुलेटप्रूफ गाड़ी के बजाय एक इनोवा चुनने का फैसला किया, जो बुलेटप्रूफ नहीं है. तब से जगदीप धनखड़ उसी इनोवा में सफर कर रहे हैं. इस संबंध में द इंडियन एक्सप्रेस खबर प्रकाशित की है. 22 जुलाई को जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी.

उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से गृह मंत्रालय से क्या किया गया अनुरोध

सूत्रों के हवाले से जो खबर दी गई है उसके अनुसार, पिछले साल 28 फरवरी को उपराष्ट्रपति सचिवालय की ओर से गृह मंत्रालय (पुलिस आधुनिकीकरण प्रभाग) के अतिरिक्त सचिव को एक पत्र भेजा गया था, जिसमें उपराष्ट्रपति की आधिकारिक गाड़ियों की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी. इस पत्र में तत्कालीन उप सचिव ने लिखा, “माननीय उपराष्ट्रपति को तीन बुलेटप्रूफ बीएमडब्ल्यू हाई सिक्योरिटी वाहन प्रदान किए गए हैं. इनमें से दो वाहन छह साल से अधिक पुराने हो चुके हैं, जबकि तीसरा वाहन लगभग चार साल पांच महीने पुराना है और अगले कुछ महीनों में वह भी पांच साल से अधिक पुराना हो जाएगा.”

नई बुलेटप्रूफ हाई-सिक्योरिटी गाड़ियों की मांग की गई

पत्र में यह भी कहा गया था कि इन वाहनों की स्थिति और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए बुलेटप्रूफ वाहनों की जरूरत है. सचिवालय ने गृह मंत्रालय से इस मामले पर विचार करने और आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया था. पत्र में आगे कहा गया कि तीनों वाहनों को नई बुलेटप्रूफ हाई-सिक्योरिटी गाड़ियों से बदलने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही अनुरोध किया गया कि इस प्रक्रिया की शुरुआत जल्द से जल्द की जाए.

यह भी पढ़ें : Jagdeep Dhankhar Resigns : अगला उपराष्ट्रपति चुनने के लिए जल्द से जल्द कराना होगा चुनाव, जानें क्या है संविधान में

पत्र के जवाब में क्या कहा गृह मंत्रालय ने

सूत्रों के अनुसार, इससे पहले एक ऐसा ही पत्र दिल्ली पुलिस की सुरक्षा शाखा को भेजा गया था. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि वाहनों की खरीदारी का काम गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा किया जाता है. 28 फरवरी के पत्र के जवाब में, गृह मंत्रालय के एक अवर सचिव ने 12 जून 2024 को उपराष्ट्रपति सचिवालय को लिखा कि तीनों बुलेटप्रूफ वाहनों की जांच के लिए अधिकारियों की एक समिति गठित की जा रही है. इसके लिए छह अधिकारियों को नामित किया गया है, जिनमें दो एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) से और एक सीआरपीएफ (केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल) से हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >