India NOTAM Bay of Bengal: भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. बदलते वैश्विक हालात, क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए देश अपनी रणनीतिक क्षमताओं को और धारदार कर रहा है. इसी कड़ी में भारत ने लंबी दूरी की मिसाइल के संभावित परीक्षण से पहले बंगाल की खाड़ी के एक बड़े हिस्से को ‘डेंजर जोन’ घोषित कर दिया है. इसके लिए ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAM) जारी किया गया है.
लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण और सैन्य तैयारियों को लेकर हालिया कदम बेहद अहम माने जा रहे हैं. यह नोटम 25 अप्रैल से 6 मई 2026 तक प्रभावी रहेगा. इस नोटिस में करीब 3,550 किलोमीटर तक फैले एक बड़े कॉरिडोर को चिन्हित किया गया है. रक्षा विशेषज्ञों ने अंदेशा जताया है कि भारत संभवतः इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) का परीक्षण कर सकता है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सूत्रों ने बताया कि तय किया गया क्षेत्र और संभावित उड़ान पथ अग्नि-IV मिसाइल की क्षमता से मेल खाते हैं.
अग्नि-IV की क्षमता क्या है?
अग्नि-IV की मारक क्षमता लगभग 3,500 से 4,000 किलोमीटर तक है. यह दो चरणों वाली ठोस ईंधन से चलने वाली मिसाइल है, जो करीब 1,000 किलोग्राम तक का वॉरहेड ले जा सकती है. यह भारत की न्यूक्लियर ट्रायड रणनीति और देश की प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत करने वाली क्षमता का अहम हिस्सा है.
ऑपरेशन सिंदूर की बरसी से पहले हो रहा टेस्ट
इस परीक्षण का समय भी ध्यान खींचने वाला है. यह अवधि उस समय के आसपास आती है, जब पिछले साल मई की शुरुआत में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था. हालांकि सरकार ने दोनों को सीधे तौर पर नहीं जोड़ा है, लेकिन जानकार इसे भारत की तैयारियों और ताकत के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं.
भारत बढ़ा रहा अपनी क्षमता
पिछले कुछ समय में भारत ने अपनी मिसाइल क्षमताओं को तेजी से बढ़ाया है. अग्नि सीरीज के अलावा, पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली K-4 मिसाइल और हाइपरसोनिक सिस्टम LRAShM जैसी तकनीकों पर भी काम जारी है. ये सभी मिलकर भारत की ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध’ नीति को मजबूत आधार देते हैं. इसी के साथ ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल की रेंज बढ़ाने पर भी काम हो रहा है. इसकी मारक क्षमता को 800 किलोमीटर तक ले जाने की योजना है और उम्मीद है कि 2027 तक इसका उन्नत संस्करण सेना में शामिल हो सकता है.
नोटम क्यों जारी किया जाता है?
नोटम जारी करना एक जरूरी सुरक्षा प्रक्रिया होती है. जब किसी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां, मिसाइल परीक्षण या हाई-रिस्क ऑपरेशन होते हैं, तो नागरिक विमानों की आवाजाही को रोकने के लिए यह कदम उठाया जाता है. जब नोटम लागू होता है, तो सिविल जहाज उस निर्धारित हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकते. इससे न सिर्फ हवाई दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है, बल्कि सेना को बिना किसी बाधा के अपने ऑपरेशन करने की सुविधा भी मिलती है.
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सैन्य आधुनिकीकरण पर है भारत का फोकस
भारत की लंबी दूरी की मिसाइलों के परीक्षण और सैन्य तैयारियों को लेकर हालिया कदम बेहद अहम माने जा रहे हैं. संभावित अग्नि-IV परीक्षण और ब्रह्मोस के उन्नयन को भारत की व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है. पूरा घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को लेकर सतर्क है और बदलती परिस्थितियों में अपनी सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है.
