नयी दिल्ली : अफगानिस्तान में तालिबान शासन का असर हैदराबादी बिरयानी प्रेमियों पर भी पड़ने लगा है. सूखे मेवे और कई मसालों से बननेवाली हैदराबादी बिरयानी की थाली अब और महंगी हो सकती है. मालूम हो कि भारत में करीब 80 फीसदी ड्राई फ्रूट अफगानिस्तान से आते हैं. इनमें पिस्ता, बादाम, अंजीर, अखरोट आदि शामिल हैं.
अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत के आने का असर भारतीय ड्राई फ्रूट व्यापार पर देखने लगा है. तालिबान ने अफगानिस्तान से होनेवाले आयात और निर्यात पर रोक लगा दी है. करीब एक माह से ड्राई फ्रूट्स के अफगानिस्तान से नहीं आने के कारण इनकी कीमत में 30 से 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
भारतीय निर्यात संगठन महासंघ के महानिदेशक डॉ अजय सहाय ने भी बीते दिनों कहा था कि ”हम अफगानिस्तान के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहे हैं. वहां से आयात पाकिस्तान के पारगमन मार्ग से आता है. अभी तक तालिबान ने पाकिस्तान को माल की आवाजाही बंद कर दी है, इसलिए लगभग आयात बंद हो गया है.”
ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में बढ़ोतरी होने से हैदराबादी बिरयानी के मूल्य में बढ़ोतरी होनी तय है. ड्राई फ्रूट्स और मसालों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर रेस्तरां पर भी पड़ा है. यहां हैदराबादी बिरयानी समेत कई पकवानों पर पड़ा है. भारत में त्योहारों का मौसम शुरू होनेवाला है. ऐसे में ड्राई फ्रूट्स वाले पकवानों पर बढ़ती कीमतों का असर पड़ सकता है.
दस दिन पहले 600 रुपये प्रति किलो बिकनेवाला बादाम अब 1000-1100 रुपये, करीब 1000 रुपये प्रति किलो बिकनेवाली अंजीर अब 1500 रुपये, 500 रुपये बिकनेवाली किशमिश 800 रुपये, 700 रुपये में बिकनेवाली काजू 1100 रुपये किलो बिकने लगी है. बाजार में ड्राई फ्रूट्स के मूल्यों में 200-250 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी देखी जा रही है.
मालूम हो कि भारत दक्षिण एशिया में अफगानिस्तान के उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार है. अफगानिस्तान में किशमिश, अखरोट, बादाम, अंजीर, पाइन नट, पिस्ता, सूखी खूबानी का खूब निर्यात होता है. अफगानिस्तान से अनार, सेब, चेरी, खरबूजा, तरबूज के अलावा हींग, जीरा जैसे मसाले के साथ-साथ केसर का भी आयात किया जाता है.
