अब भारत में नहीं होगी पेट्रोल-डीजल और LPG की कमी? सरकार ने बनाया ये प्लान

अगर Essential Commodities Act के सेक्शन 3 के तहत दिए गए आदेश का कोई उल्लंघन करता है, तो इसे अपराध माना जाएगा. यही नहीं उसे जेल भी हो सकती है. तेल और गैस कंपनियों को डेटा शेयर करना होगा.

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध (ईरान और यूएस-इजरायल के बीच जंग) के कारण दुनियाभर में एनर्जी क्राइसिस बना हुआ है. इसी बीच भारत सरकार ने Essential Commodities Act लागू कर दिया है. अब पेट्रोलियम और नेचुरल गैस से जुड़े सभी लोगों और कंपनियों (चाहे वो प्रोडक्शन, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट या बिक्री में हों) को अपनी ताजा जानकारी पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) को देना जरूरी होगा, ताकि हालात पर नजर रखी जा सके और सप्लाई सही बनी रहे.

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि Essential Commodities Act का सेक्शन 3 लागू है. इसके जरिए PPAC को नोडल एजेंसी बनाया गया है. यह तेल-गैस से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करेगा, संभालेगा और उसका एनालिसिस करेगा. PPAC ही मंत्रालय का मुख्य डेटा संभालने वाला विभाग है.

PPAC पहले से ही जुटाता है तेल-गैस सेक्टर का डेटा

वैसे तो PPAC पहले से ही तेल-गैस सेक्टर का डेटा जुटाता है, लेकिन नए आदेश के बाद अब वह ज्यादा बारीकी और लगभग रियल टाइम में जानकारी ले सकेगा. इससे मंत्रालय को अचानक आने वाली किसी भी परेशानी या इमरजेंसी हालात से निपटने की बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी. अगर कोई सेक्शन 3 के तहत दिए गए आदेश को नहीं मानता, तो उसे अपराध माना जाएगा. उस पर केस चल सकता है, यहां तक कि जेल भी हो सकती है.

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देश में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठीक

शर्मा ने 19 मार्च को बताया कि देश में कच्चे तेल की सप्लाई पूरी तरह ठीक है. रिफाइनरी फुल कैपेसिटी पर काम कर रही हैं. पेट्रोल पंप भी सामान्य तरीके से चल रहे हैं और कहीं भी तेल खत्म होने जैसी कोई समस्या नहीं है. उन्होंने बताया कि PNG और CNG की सप्लाई भी पूरी तरह 100% चल रही है. साथ ही, कमर्शियल LPG इस्तेमाल करने वालों को PNG पर शिफ्ट होने के लिए कहा जा रहा है. जहां नेटवर्क है, वहां सिटी गैस कंपनियां जल्दी कनेक्शन दे रही हैं और कुछ इंसेंटिव भी दिए जा रहे हैं.

Essential Commodities Act क्या है?

Essential Commodities Act (ECA) 1955 में बना था. आम लोगों के हित में जरूरी सामान के उत्पादन, सप्लाई और बिक्री पर सरकार इसके जरिए नजर रखती है. मतलब अगर कोई जमाखोरी करे या कालाबाजारी करे तो वह इसके दायरे में आएगा.

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By Amitabh Kumar

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