Conversion in India : भारत में जबदस्ती कराये गये धर्मांतरण को रोकने के लिए देश में कोई केंद्रीय कानून नहीं है, हां कुछ राज्यों ने धर्मांतरण को लेकर कानून बनाए हैं. उत्तरप्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड और ओडिशा जैसे राज्यों ने इस तरह का कानून बनाया है. राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने सरकार से यह मांग की कि जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए सरकार कानून बनाए, ताकि आदिवासी समुदाय की पहचान और उनकी संस्कृति को बचाया जा सके.
धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,धोखे से किसी का धर्म बदलवाने की इजाजत नहीं देता
राज्यसभा में शुक्रवार को मध्यप्रदेश के सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि देश में जबरन धर्मांतरण की वजह से आदिवासी समुदाय की पहचान और उनकी संस्कृति नष्ट होती जा रही है.जबरन धर्मांतरण का सबसे अधिक असर आदिवासियों पर ही देखने को मिल रहा है.शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सोलंकी ने कहा कि संविधान धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, लेकिन धोखा, दबाव और लालच के जरिए कराया गया धर्म परिवर्तन हर दृष्टिकोण से गलत है.उन्होंने कहा, इस प्रकार का धर्मांतरण हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और इस पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.
आदिवासियों की पहचान सनातन धर्म और संस्कृति से जुड़ी है
सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने कहा कि आदिवासी समुदाय की पहचान सनातन धर्म की संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी है, लेकिन आदिवासी समुदाय को डराकर, रोजगार, चिकित्सा और शिक्षा का लालच देकर और फर्जी विवाह के जरिए भी उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है.उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संगठित और सामूहिक धर्मांतरण संगठित अपराध की श्रेणी में आते हैं. जबरन धर्मांतरण की वजह से ग्रामीण इलाकों में तनाव बढ़ रहा है.सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के 24 मार्च, 2026 के फैसले का स्वागत किया, जिसमें धर्म परिवर्तन के बाद अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होने की बात कही गई है.
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