केंद्र सरकार ने ई-रिक्शा की बैटरी को हैक करने वाले ऐप्स को हटाने का आदेश दिया

E-rickshaw : सरकार ने BAT-BMS, लॉसिगी, इपोक-आई-आयन एप को हटाने का आदेश जारी कर दिया है. इन एप के जरिए देशभर में ई-रिक्शा के परिचालन को रोका जा रहा था.

E-rickshaw : केंद्र सरकार ने बैटरी से चलने वाली गाड़ियों को रिमोटली डिसेबल करने में गलत इस्तेमाल हो रहे BAT-BMS, लॉसिगी, इपोक-आई-आयन एप को हटाने का आदेश दिया. यह जानकारी पीटीआई न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से दी है.

सरकार की यह कार्रवाई कुछ वीडियो सामने आने के बाद हुई, जिनमें दिखाया गया था कि चीनी स्मार्टफोन ऐप बैट-बीएमएस के रिमोट शटडाउन फीचर के जरिये ई-रिक्शा को दूर से बंद किया जा सकता है.वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट से जुड़ी वाहन प्रबंधन प्रणालियों की साइबर सुरक्षा को लेकर व्यापक चिंता पैदा हो गई.सूत्रों ने बताया कि सरकार ने बैटरी चालित वाहनों को दूर से बंद करने के लिए इस्तेमाल हो रहे बैट-बीएमएस, लॉसिजी और एपॉक-आई-आयन ऐप हटाने का आदेश दिया है.

ऐप स्टोर को सावधानी बरतनी चाहिए : सचिव

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस कृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि ऐप स्टोर को नुकसान पहुंचाने वाले एप्लिकेशन को यूजर्स तक पहुंचने से रोकने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए. ई-रिक्शा से जुड़े फ्रॉड से कथित तौर पर जुड़े ऐप्स पर एक सवाल का जवाब देते हुए कृष्णन ने कहा कि कल हमारे ध्यान में कुछ ऐप्स आए. उन दोनों को ऐप स्टोर से हटा दिया गया है. यह टिप्पणी डिजिटल एप्लिकेशन के गलत इस्तेमाल से कनेक्टेड डिवाइस में दखल देने और साइबर फ्रॉड को बढ़ावा देने पर बढ़ती चिंताओं के बीच आई है. उन्होंने कहा कि हम ऐप स्टोर के साथ इस पर बात करेंगे ताकि यह देखा जा सके कि संभावित रूप से नुकसान पहुंचाने वाले ऐप न आएं

ई-रिक्शा के काम को किया जा रहा था बाधित

पिछले कुछ दिनों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं जिसमें यह बताया जा रहा था कि ई-रिक्शा ड्राइवरों को अचानक रिक्शा बंद हो जाने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. कुछ ऐप का गलत इस्तेमाल ई-रिक्शा के काम में प्रैंक करने या दखल देने के लिए किया जा रहा था, जिससे अचानक दिक्कतें हो रही थीं. इसकी वजह से ड्राइवरों और यात्रियों के लिए सुरक्षा की चिंताएं पैदा हुईं.

ये भी पढ़ें : बेंगलुरु : IT कंपनी के डेकेयर में बच्चों से दुर्व्यवहार, रोने पर बच्चों को वाशिंग मशीन और बाथरूम में किया जाता था बंद

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >