सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय (MHA) को निर्देश दिया है कि वह 2 जनवरी, 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को पूरे भारत में औपचारिक रूप से अपनाए और लागू करे, ताकि साइबर फ्रॉड के मामलों में प्रभावी इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन सुनिश्चित किया जा सके. जिसमें धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों की लोकेशन का पता लगाना भी शामिल है. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि इसे लागू करने के लिए जरूरी नियम दो हफ्ते के अंदर नोटिफाई किए जाएं. कोर्ट ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पहले ही SOP तैयार कर लिया है, जो बैंकों को साइबर फ्रॉड के खिलाफ बचाव के तौर पर खातों पर अस्थायी डेबिट रोक लगाने का अधिकार देता है.
बैंकों को डिजिटल फ्रॉड मामले में समय पर कार्रवाई करने का निर्देश
भारतीय रिजर्व बैंक एवं अन्य बैंकों को डिजिटल धोखाधड़ी के मामले में समय पर कार्रवाई करने के लिए कहा. कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के कारण धोखाधड़ी की यह घटना हो सकती है.
चार हफ्ते में एमओयू का एक मसौदा तैयार करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि डिजिटल धोखाधड़ी से असरदार तरीके से निपटने के लिए अंतर विभागीय एजेंसियां चार हफ्ते में एमओयू का एक मसौदा तैयार करें.
सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पहचान करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट के मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया और गुजरात एवं दिल्ली सरकारों से पहचान किये गए मामलों में जांच की अनुमति देने का आदेश दिया.
