Covishield Vaccine से हार्ट अटैक का खतरा! एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटेन के कोर्ट में ब्लड क्लॉटिंग की बात स्वीकारी

Covishield Vaccine: कोरोना महामारी से बचाव के लिए करोड़ों लोगों को कोविशील्ड वैक्सीन लगाई गई थी. लेकिन 4 साल बाद इससे जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है. वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ने पहली बार साइड इफेक्ट्स की बात स्वीकार की है.

Covishield Vaccine: कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका ने ब्रिटेन के हाईकोर्ट में इस बात को स्वीकार किया है कि वैक्सीन लेने से ब्लड क्लॉटिंग और टीटीएस जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं. मालूम हो कि भारत में आदर पूनावाला की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ने कोविशील्ड वैक्सीन का उत्पादन किया था.

कोविशील्ड से दिल का दौरा पड़ने का खतरा!

ब्रिटेन स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया है कि इसका कोविड टीका रक्त के थक्के जमाने संबंधी दुष्प्रभाव उत्पन्न कर सकता है, लेकिन इनके बीच कोई संबंध होने की जानकारी नहीं है. ब्रिटेन के एक अखबार ने अदालती दस्तावेज के हवाले से यह दावा किया है. ‘द डेली टेलीग्राफ’ की रिपोर्ट के अनुसार, 51 वादियों द्वारा एक सामूहिक कार्रवाई के अनुरोध पर फरवरी में लंदन स्थित हाईकोर्ट में एक कानूनी दस्तावेज सौंपा गया था. एस्ट्राजेनेका ने स्वीकार किया था कि कोविड-19 से बचाव के लिए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा ईजाद किया गया टीका बहुत दुर्लभ मामलों में रक्त को थक्के जमा सकता है और प्लेटलेट की संख्या को घटा सकता है. अखबार ने कानूनी दस्तावेज के हवाले से कहा है, यह स्वीकार किया गया है कि एस्ट्राजेनेका टीका, बहुत दुर्लभ मामलों में रक्त के थक्के जमा सकता है और प्लेटलेट की संख्या को घटा सकता है. लेकिन इसका कारण अज्ञात है. साथ ही, यह दुष्प्रभाव एस्ट्राजेनेका टीका (या कोई अन्य टीका) नहीं लगाने की स्थिति में भी देखने को मिल सकता है. वाद दायर करने वालों की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा कि वे या उनके प्रियजन, जिन्होंने एस्ट्राजेनका टीका लगवाया है, उनमें एक दुर्लभ लक्षण पाया गया है जिसे रक्त का थक्का जमना और प्लेटलेट की कमी (टीटीएस) के रूप में परिभाषित किया गया है.

एस्ट्राजेनेका ने कोर्ट में वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स पर क्या कहा

यूके के कोर्ट में एस्ट्राजेनेका ने वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स (Covishield Side Effects) पर कहा, कोविशील्ड बहुत की रेयर केस में टीटीएस का कारण बन सकता है. मालूम हो एस्ट्राजेनेका को यूके में मुकदमे का सामना करना पड़ रहा है. कंपनी के खिलाफ करीब 51 मामले दर्ज किए गए हैं.

एस्ट्राजेनेका के खिलाफ 51 मामले दर्ज

टीके के दुष्प्रभाव को लेकर एस्ट्राजेनेका यूके लिमिटेड के खिलाफ ब्रिटेन के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1987 की धारा 2 के तहत क्षतिपूर्ति के लिए अदालत में वादियों का प्रतिनिधित्व लॉ फर्म ली डे कर रही है. 51 वादियों में शामिल 12 ने अपने प्रियजनों को खो दिया है. लॉ फर्म में साझेदार सारा मूर ने कहा, सभी वादियों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र या मेडिकल साक्ष्य हैं जो इसकी पुष्टि करते हैं कि टीके के कारण मौतें हुईं या शरीर को नुकसान पहुंचा. उन्होंने कहा, एस्ट्राजेनेका को यह स्वीकार करने में एक साल लग गया कि उसके टीके ने यह नुकसान पहुंचाया, जबकि 2021 के अंत से क्लिनिकल समुदाय में यह तथ्य व्यापक रूप से स्वीकार कर लिया गया था. इस संदर्भ में, अफसोस की बात है कि एस्ट्राजेनेका, सरकार और उनके वकील लोगों के जीवन पर टीके के पड़ने वाले गंभीर दुष्प्रभाव को गंभीरता से लेने के बजाय रणनीतिक खेल खेलने और कानूनी फीस बढ़ाने के लिए कहीं अधिक उत्सुक हैं.

एस्ट्राजेनेका ने दावों से किया इनकार

एस्ट्राजेनेका ने इन दावों से सख्त इनकार किया है. एस्ट्राजेनेका ने एक बयान में कहा, हमारी सहानुभूति उन लोगों के प्रति है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है या स्वास्थ्य समस्याओं की सूचना दी है. रोगी की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और नियामक अधिकारियों के पास टीकों सहित सभी दवाओं के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और कड़े मानक हैं. ब्रिटिश-स्वीडिश बहुराष्ट्रीय कंपनी एस्ट्राजेनेका का कहना है कि टीके से संबंधित उत्पाद जानकारी अप्रैल 2021 में ब्रिटेन के नियामक की मंजूरी के साथ अद्यतन की गई थी, जिसमें इस संभावना को शामिल किया गया था कि एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड टीका बहुत ही दुर्लभ मामलों में टीटीएस का कारण बन सकता है, जो यह संकेत देता है कि इस पहलू के बारे में अदालती दस्तावेज में दिया गया संदर्भ कोई नयी चीज नहीं है.

क्या है टीटीएस (TTAS)

टीटीएस, जिसे थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम कहा जाता है. टीटीएस के परिणाम संभवत: जानलेवा हैं जिनमें दिल का दौरा पड़ना, मस्तिष्क को नुकसान पहुंचना, फेफड़े में रक्त प्रवाह बाधित होना आदि शामिल हैं. टीटीएस से सिरदर्द, पेट दर्द, पैर में सूजन, सांस की तकलीफ जैसी परेशानी होती है.

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार विशेषज्ञ डॉ राजीव जयदेवन ने कहा कि थ्रोम्बोसिस थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम ( टीटीएस ) कुछ प्रकार के टीकों के प्रयोग के बाद दुर्लभ मामलों में होता है. उन्होंने कहा, कोविड वैक्सीन ने कई लोगों की जान बचाई है. ब्रिटिश भारतीय हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ असीम मल्होत्रा ने कहा, यह बहुत ही चिंता की बात है कि अब केवल एस्ट्राजेनेका ही अपने कोविड टीके से गंभीर नुकसान को स्वीकार कर रहा है. निश्चित रूप से, वे इसे शुरू से ही जानते होंगे और इसलिए इस बारे में गंभीर सवाल रहे होंगे कि क्या इसे सबसे पहले मानव को दिया जाना चाहिए था. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने टीके को प्रतिकूल प्रभाव के साथ 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी व्यक्तियों के लिए सुरक्षित और प्रभावकारी बताया था. इस बीच, एसआईआई से प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए संपर्क किया गया है.

नोट – भाषा इनपुट के साथ

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >