कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन, सिख विरोधी दंगा में आजीवन कारावास की सुनाई गई थी सजा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया है. उन्हें 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी.

पूर्व सांसद और इंडियन नेशनल कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है. उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था. एएनआई न्यूज एजेंसी ने अस्पताल के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है. 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उन्होंने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था.


2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी सजा

अस्पताल ने अभी तक उनकी मौत की वजह नहीं बताई है. सज्जन कुमार को दिसंबर 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 के दंगों के दौरान पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे को जलाने के मामले में उनकी भूमिका के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई थी. वे तिहाड़ जेल में बंद थे.फरवरी 2025 में दिल्ली की एक कोर्ट ने दंगों के दौरान दो सिख लोगों की हत्या से जुड़े एक अलग मामले में भी कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.तीन बार लोकसभा सांसद रहे सज्जन कुमार बाहरी दिल्ली सीट से सांसद थे और कांग्रेस के एक जाने-माने नेता थे. 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट से दोषी ठहराए जाने के बाद उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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