Congress Crisis : राजीव गांधी की तरह सटीक निशाना क्यों नहीं साध पा रहे राहुल गांधी ?जानें

Congress Crisis : क्या राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर जल्द ही आसीन नजर आएंगे ? ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि पार्टी नेताओं की लगातार मांग के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं. दरअसल कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि कोरोना महामारी से देश के उबरने के बाद कांग्रेस को जमीन पर उतरकर लड़ाई लड़नी है और राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए क्योंकि इस लड़ाई में ‘सेनानायक' की जरूरत पड़ेगी.

Congress Crisis : क्या राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर जल्द ही आसीन नजर आएंगे ? ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि पार्टी नेताओं की लगातार मांग के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं. दरअसल कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि कोरोना महामारी से देश के उबरने के बाद कांग्रेस को जमीन पर उतरकर लड़ाई लड़नी है और राहुल गांधी को फिर से पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए क्योंकि इस लड़ाई में ‘सेनानायक’ की जरूरत पड़ेगी.

यह पूछे जाने पर कि क्या इस समय राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनना चाहिए तो 72 वर्षीय रावत ने कहा, बिल्कुल बन जाना चाहिए. इस समय हमको वाररूम शैली की लड़ाई नहीं लड़नी है. कोरोना के बाद हमें मैदान में उतरकर लड़ाई लड़नी है. इस लड़ाई में सबको उतरना पड़ेगा, लेकिन सेनानायक तो होना चाहिए. साथ ही, उन्होंने कहा, ऐसा नहीं है कि सोनिया जी कमजोर लड़ाई लड़ रही हैं. लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है.

गौरतलब है कि पिछले साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद से कांग्रेस के कई नेता राहुल गांधी को फिर से अध्यक्ष बनाए जाने की मांग करते रहे हैं.

हाल में कई युवा नेताओं की नाराजगी और बगावत के संदर्भ में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, जब हम लोग युवा नेता के तौर पर पार्टी में आए थे तो उस वक्त राजीव गांधी जी ने हमारे और वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने की कोशिश की थी. उस वक्त हम सत्ता में थे और परिस्थितियां भिन्न थीं.

रावत ने कहा, परिस्थितियों की इन्हीं भिन्नताओं के कारण ही आज राहुल गांधी जी जो कर रहे हैं वो उतना सटीक नहीं दिखाई दे रहा है जितना सटीक राजीव गांधी के समय था. आज हमें कामयाबी नहीं मिल पा रही क्योंकि दूसरे पक्ष ने लक्ष्य बनाकर हमें तोड़ने का निश्चय कर रखा है. इसी में कुछ लोग महत्वाकांक्षा के चक्कर में फंस जाते हैं.

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इधर कांग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने एक बार फिर पार्टी में फुलटाइम अध्यक्ष की मांग उठा दी है. उन्होंने पार्टी नेताओं के असमंजस की स्थिति में होने का दावा करते हुए कहा कि अध्यक्ष का मुद्दा पहले ही सुलझाना चाहिए था और अब तो वक्त आ ही गया है कि चयन से या चुनाव से, पार्टी को अपना अध्यक्ष नियुक्त करना ही चाहिए.

Posted By : Amitabh Kumar

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