हाई कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे अमित जोगी को 2003 में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले में दोषी ठहरा दिया. कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है. इस मामले की जानकारी सीबीआई के वकील ने दी. कोर्ट ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले में कार्यवाही फिर से शुरू की थी.
कोर्ट के फैसले के बाद अमित जोगी ने एक्स पर लिखा कि आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए. मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है. अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है. मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है. मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा. मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूं. मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं. सत्य की जीत अवश्य होगी. आप सभी से आग्रह है कि मेरे लिए प्रार्थना करें और अपना आशीर्वाद बनाए रखें. जय छत्तीसगढ़…
4 जून 2003 को हुई थी जग्गी की हत्या
सीबीआई के वकील वैभव ए गोवर्धन ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने अमित जोगी को सरेंडर करने का आदेश दिया. बता दें, एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को हुई थी, जब अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे.
शुरुआत में जांच राज्य पुलिस ने की
इस केस की शुरुआत में जांच राज्य पुलिस ने की थी. 2003 में बीजेपी की जीत के बाद रमन सिंह की सरकार ने मामला सीबीआई को सौंप दिया. इसके बाद सीबीआई ने अमित जोगी समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और मामले की आगे की जांच शुरू की.
अमित जोगी सबूतों के अभाव में बरी हुए थे
रायपुर की एक अदालत ने 31 मई 2007 को कहा कि अभियोजन पक्ष (जो आरोपी के खिलाफ केस लड़ता है) 28 आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा. लेकिन उसी फैसले में अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, यानी उन्हें उस समय इस मामले में क्लीन चिट मिल गई थी.
पिछले साल (2025) नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से कहा था कि वो सीबीआई की उस याचिका पर दोबारा विचार करे, जिसमें जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी गई थी.
