सोशल मीडिया पर PRANAM Act को लेकर कई पोस्ट शेयर की जा रही हैं. इनमें दावा किया जा रहा है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करता है, तो उसकी सैलरी से 10 से 15 फीसदी रकम सीधे काट ली जाती है. कुछ वायरल पोस्ट में इसे ऐसे भी बताया गया कि यह रकम अपने आप कर्मचारी की सैलरी से कटकर माता-पिता के खाते में चली जाती है. आइए जानते क्या है इसकी सच्चाई?
असम में लागू है PRANAM Act 2017
असम में माता-पिता की जिम्मेदारी को लेकर PRANAM Act, 2017 लागू है. इसका पूरा नाम Assam Employees' Parent Responsibility and Norms for Accountability and Monitoring Act है. कानून का मकसद सरकारी कर्मचारियों को अपने आश्रित माता-पिता और दिव्यांग भाई-बहनों की देखभाल के लिए जवाबदेह बनाना है.
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फॉलो करनी पड़ती है पूरी प्रक्रिया
असम सरकार के आधिकारिक PRANAM पोर्टल के मुताबिक, आश्रित माता-पिता या दिव्यांग भाई-बहन शिकायत कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें निर्धारित अधिकारी के पास आवेदन देना होता है. इसके बाद मामले की जांच होती है. कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का मौका भी दिया जाता है. वहीं, आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कर्मचारी की सैलरी का एक हिस्सा माता-पिता या दिव्यांग भाई-बहन को देने का आदेश दिया जा सकता है.
कितनी रकम दी जा सकती है?
असम सरकार के PRANAM पोर्टल के FAQ के मुताबिक, आश्रित माता-पिता या दिव्यांग भाई-बहन को मासिक सकल वेतन का 10 फीसदी तक मुआवजा दिया जा सकता है. वहीं, कुछ असाधारण मामलों में यह सीमा 15 फीसदी तक हो सकती है.
यह रकम कर्मचारी के सकल मासिक वेतन के आधार पर तय होती है. इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहा दावा कि हर सरकारी कर्मचारी की सैलरी से 10-15 फीसदी अपने आप कटती है, कानून के आधिकारिक नियम से मेल नहीं खाता.
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शिकायत कौन कर सकता है?
PRANAM Act के तहत कर्मचारी के आश्रित माता-पिता या आश्रित दिव्यांग भाई-बहन शिकायत कर सकते हैं. आश्रित माता-पिता से मतलब ऐसे माता-पिता से है जिनके पास अपनी पर्याप्त आय नहीं है और वे अपने बेटे या बेटी पर निर्भर हैं. इसी तरह आश्रित दिव्यांग भाई या बहन के लिए भी आय और निर्भरता से जुड़ी शर्तें हैं.
शिकायत संबंधित कर्मचारी के संस्थान के नामित अधिकारी के पास की जाती है. अधिकारी को आवेदन मिलने के बाद मामले पर फैसला करने के लिए अधिकतम 90 दिन का समय दिया गया है. वहीं, फैसले से असंतुष्ट होने पर अपील का भी प्रावधान है.
