भाजपा के लिए खतरा बनी शिवसेना, BMC में कांग्रेस से गंठबंधन पर हो रही अंदरखाने बातचीत !

मुंबई : बीएमसी चुनाव में अपने दम पर अलग चुनाव लड़ने वाली भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी शिवसेना अब धीरे-धीरे मुंबई में देवेंद्र फड़णवीस सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा रही है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीएमसी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद शिवसेना देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका […]

मुंबई : बीएमसी चुनाव में अपने दम पर अलग चुनाव लड़ने वाली भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी शिवसेना अब धीरे-धीरे मुंबई में देवेंद्र फड़णवीस सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा रही है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीएमसी चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद शिवसेना देश की सबसे बड़ी महानगरपालिका को चलाने के लिए कांग्रेस का हाथ थामने की तैयारी में है.

मीडिया में चल रही खबरों को अगर माने तो शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को कांग्रेस से मेयर पद के लिए समर्थन मांगा है. बदले में उद्धव ने कांग्रेस को डिप्‍टी मेयर का पद देने का ऑफर किया है. हालांकि कांग्रेस ने साथ कर दिया है कि वो डिप्‍टी मेयर के चुनाव में शिवसेना के साथ हाथ नहीं मिला रही है. कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने कहा कि हमने फैसला किया है कि डिप्‍टी मेयर के चुनाव में कांग्रेस पार्टी शिवसेना के साथ नहीं जा रही है.

हालांकि कांग्रेस ने भी माना की कुछ शिवसेना के नेताओं ने उनसे समर्थन के लिए संपर्क किया था. संजय निरुपम ने कहा कि हमने स्पष्ट रूप से कहा कि हम सांप्रदायिक पार्टी है जो जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करती है के साथ गठबंधन नहीं कर सकते.

अगर बीएमसी में कांग्रेस और शिवसेना का गंठबंधन होता है तो फड़णवीस सरकार के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है. ऐसा इसलिए क्‍योंकि महाराष्‍ट्र में भाजपा और शिवसेना के सहयोग से सरकार चल रही है. अगर शिवसेना और कांग्रेस का गंठबंधन होता है तो महाराष्‍ट्र में सरकार से शिवसेना अपना समर्थन वापस ले सकती है. अगर ऐसा होता है तो मध्‍यावधि चुनाव के होने के आसार बढ़ जाएंगे या फिर भाजपा को अपनी सरकार बचाने के लिए शरद पवार की पार्टी एनसीपी के साथ हाथ मिलाना पड़ेगा.
इधर भाजपा बीएमसी के लिए गंठबंधन के लिए अपना दरवाजा खुला रखा है. केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने साफ किया था कि हालात के मद्देनजर दोनों ही पार्टियों को साथ आना चाहिए. हालांकि शिवसेना ने भी भाजपा के साथ गंठबंधन को पूरी तरह से खारिज नहीं किया है.
गौरतलब हो कि बीएमसी चुनाव में शिवसेना को सबसे अधिक 84 सीट मिली, वहीं भाजपा को भी 82 सीट मिले. कांग्रेस को 31 सीट के साथ तीसरे स्‍थान से ही संतोष करना पड़ा. हालांकि कोई भी पार्टी को बहुमत का आंकड़ा नहीं मिला है. बहुमत के लिए जादूई आंकड़ा 114 का है.

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