सरकारी अधिकारियों ने दी जानकारी–खाड़ी क्षेत्र में फंसे 20 जहाज और सभी 540 लोग सुरक्षित

Iran War :  खाड़ी युद्ध के 28वें दिन में प्रवेश करने के बाद भारत पर इसके असर, खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीयों और आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार द्वारा की जा रही व्यवस्था के बारे में सरकारी अधिकारियों ने जानकारी दी.

Iran War : ईरान–अमेरिका युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में फंसे भारतीय जहाजों और उनपर सवार लोगों की जानकारी देते हुए राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले 24 घंटे में कहीं से किसी तरह की दुर्घटना की खबर नहीं है. राजेश सिन्हा पोर्ट्स, शिपिंग और वॉटरवेज मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी हैं. उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में हमारे  20 जहाज हैं, जिनपर सवार सभी 540 लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं.

DG शिपिंग का DGComm सेंटर 24 घंटे है एक्टिव

राजेश सिन्हा ने खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध के दौरान भारतीयों की सुरक्षा को लेकर अपडेट देते हुए बताया कि डीजी शिपिंग DGComm सेंटर 24X7 एक्टिव रहता है, उसने 98 कॉल और 335 ईमेल हैंडल किए हैं. डीजी काॅम सेंटर की मदद से  25 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की गई है. किसी भी पोर्ट, बड़े या छोटे, पर किसी भी तरह की भीड़ की खबर नहीं है. इस बात की  पुष्टि सभी बड़े पोर्ट और गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के स्टेट मैरीटाइम बोर्ड से बातचीत के बाद की गई है.

खाड़ी क्षेत्र में युद्ध से LPG और LNG की सप्लाई पर असर 

प्रेस काॅन्फ्रेंस में पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि मिडिल ईस्ट में लड़ाई की वजह से भारत में कच्चे तेल, LPG और LNG की सप्लाई पर असर पड़ा है. इंटरनेशनल मार्केट में दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार ने कई जरूरी फैसले किए हैं.

रिफाइनरियां पूरी कैपेसिटी से ज्यादा पर काम कर रही हैं

सुजाता शर्मा ने बताया कि हमारे पास क्रूड ऑयल का स्टॉक है और अगले दो महीनों तक सप्लाई की कोई दिक्कत नहीं है.  उन्होंने बताया कि हमारी रिफाइनरियां अपनी पूरी कैपेसिटी से ज्यादा पर काम कर रही हैं. घरेलू LPG प्रोडक्शन लगभग 40% बढ़ गया है. भारत की इम्पोर्ट पर डिपेंडेंसी बहुत अधिक है और लगभग 90% LPG इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट से होता है. इसी वजह से सप्लाई पर असर पड़ा है और सरकार ने कमर्शियल सप्लाई के बजाय घरेलू कंज्यूमर्स को प्रायोरिटी देने का फैसला किया है.  कुछ जगहों पर अफवाहों के बावजूद, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लग गईं, कोई कमी नहीं है. भले ही इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत करीब $70 प्रति बैरल से बढ़कर $100 से ज़्यादा हो गई, सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी प्रोडक्ट की कमी न हो. कई पड़ोसी देशों के उलट, जहां फ्यूल की कीमतें बढ़ी हैं, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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