केंद्र सरकार के पास नहीं है शहीद की परिभाषा

नयी दिल्ली : दिल्ली के आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने केंद्र सरकार से शदीद की परिभाषा के संदर्भ में जानकारी मांगी है. जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि उनके पास शहीद की कोई परिभाषा नहीं है. गोपाल प्रसाद ने गृहमंत्रालय से पूछा था कि एक जैसा काम कर रहे सेना और अर्द्धसैनिक बलों […]

नयी दिल्ली : दिल्ली के आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने केंद्र सरकार से शदीद की परिभाषा के संदर्भ में जानकारी मांगी है. जिसके जवाब में केंद्र सरकार ने कहा कि उनके पास शहीद की कोई परिभाषा नहीं है.

गोपाल प्रसाद ने गृहमंत्रालय से पूछा था कि एक जैसा काम कर रहे सेना और अर्द्धसैनिक बलों की मौत की स्थिति में क्या सिर्फ सेना के जवानों को ही शहीद कहलाए जाने का अधिकार है? उन्होंने कहा कि अर्द्धसैनिक बलों के ऐसे जवानों को सिर्फ मृतक क्यों करार दिया जाता है.
देश में सैनिक एवं अर्देधसैनिक बलों को सीमा पर दुश्मन, आंतकी कार्रवाई, दंगों, नक्सलवाद, उग्रवाद जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है. अब सवाल यही है कि क्या इन समस्याओं से जूझते हुए मरने वाले सेना के जवान ही शहीद की श्रेणी में आते हैं या अर्द्धसैनिक बलों को भी शहीद का दर्जा मिल पाता है.
गृह मंत्रालय ने इस पर जवाब दिया है कि भारत सरकार किसी के बलिदान में भेदभाव नहीं करती है. वीरता प्रदर्शन के लिए सरकार अशोक चक्र देती है. यह सम्मान सेना, वायु सेना, नौसेना, रिजर्व बल या प्रादेशिक बल के सभी पुरुष और महिला अफसरों दिया जा सकता है. कीर्ति चक्र शौर्य चक्र देने में भी कोई भेदभाव नहीं किया जाता है.
इन सम्मानों की सिफारिश रक्षा मंत्रालय द्ववारा की जाती है. सेवा काल हो या सेवानिवृत्ति के बाद भी नियन यह है कि सभी को एक जैसे लाभ मिलते हैं

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