कश्‍मीर मुद्दे पर संसद में विपक्ष की घेराबंदी, स्थगन प्रस्ताव के दिये नोटिस

नयी दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों में कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है. पार्टी की ओर से लोकसभा और राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए गए हैं. पार्टी इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब की मांग करेगी. सूत्रों का कहना है कि […]

नयी दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात की पृष्ठभूमि में कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों में कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है. पार्टी की ओर से लोकसभा और राज्यसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के नोटिस दिए गए हैं. पार्टी इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब की मांग करेगी. सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दलों ने इसी मामले पर बैठक भी की है. कांग्रेस, आरजेडी, डीएमके, पीडीपी, सीपीएम समेत कई पार्टियों ने ससंद में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है.

कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा के कई नेताओं को नजरबंद किये जाने की निंदा की है. उसका कहना है कि राज्य को मिली संवैधानिक गारंटी को बरकरार रखा जाना चाहिए.

डीएमके सांसद, टीआर बालू ने लोकसभा में कश्मीर मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव दिया है.

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत नोटिस दिया, आज व्यापार स्थगित करने और कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की. आज के कारोबार को निलंबित करने और कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की मांग की.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद बिनॉय विश्वम ने कश्मीर मुद्दे को लेकर राज्यसभा में आज नियम 267 के तहत नोटिस दिया है.

दिल्ली: पीडीपी के राज्यसभा सांसद नजीर अहमद लावे और मीर मोहम्मद फैयाज ने कश्मीर के हालात को लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया.

AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कश्मीर मुद्दे पर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है.

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के राज्यसभा सांसद, नजीर अहमद लावे ने कश्मीर मुद्दे पर सदन में शून्यकाल नोटिस दिया.

गौरतलब है कि कश्मीर में अभूतपूर्व सुरक्षा और हलचल के बीच मुख्यधारा के कई बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है. पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को आधी रात उनके घर में नजरबंद किया गया. पीपल्स कॉन्फ्रेंस नेता सज्जाद लोन को लेकर भी यही सूचना है. पिछले दिनों सरकार ने पर्यटकों, अमरनाथ यात्रियों को घाटी में रहने की अवधि में कटौती करने का परामर्श जारी किया था और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की थी जिसके बाद से राज्य में हलचल तेज हो गई.

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