नयी दिल्लीः लोकसभा चुनाव 2019 में दो चरणों का मतदान शेष है. चुनावी नतीजे आने के बाद अगर एनडीए को पूर्ण बहुमत नहीं मिलता है तो उस स्थिति में यूपीए या फिर विपक्ष क्या कर सकता है, इसकी रणनीति बनाने में विपक्ष के दिग्गज जुट गए हैं. इस चुनाव में विपक्षी दल अलग-अलग या फिर अलग-अलग गठबंधनों के साथ चुनाव मैदान में हैं. कुछ पार्टियां तो क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और अलग-अलग विचार की वजह से एक दूसरे से सीधे संपर्क में भी नहीं हैं.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी नेता चन्द्रबाबू नायडू तमाम विपक्षी पार्टियों के बीच एक पुल की तरह उभरे हैं. वो चुनावी नतीजों के पहले बिखरे हुए विपक्ष को जोड़ने की कवायद में जुटे हुए हैं. बुधवार को उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक की. बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच ईवीएम और दूसरे कई मसलों पर बातचीत हुई है. माना जा रहा है कि ममता बनर्जी, मायावती और अखिलेश यादव जैसे नेताओं को यूपीए के साथ लाने के लिए चंद्रबाबू नायडू इनसे बातचीत करेंगे.
जानकारी के मुताबिक, उन्होंने 19 मई को आखिरी चरण की वोटिंग और 23 मई को नतीजों से पहले 21 मई को भाजपा विरोधी पार्टियों की एक बैठक बुलाने की योजना पर चर्चा की. सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार को विपक्षी दलों की वह याचिका, जिसमें ईवीएम की गड़बड़ी रोकने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत मतदान पर्चियों का मिलान ईवीएम से कराए जाने की बात कही गई थी, खारिज कर दी गई थी. ईवीएम के मुद्दे को लेकर विपक्ष ने कई बार पहले भी एकजुटता दिखाई थी.
विपक्षी दलों में आप, टीएमसी, आरजेडी और बसपा सहित कई दल बैलेट पेपर की वापसी की मांग कर चुके हैं. बता दें इस इससे पहले भी चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने में अहम भूमिका निभाई थी। राहुल गांधी के साथ बैठक में चंद्रबाबू नायडू ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें और दूसरे नेताओं को ईवीएम पर भरोसा नहीं है.
