नयी दिल्ली:खूनी संघर्ष में फंसी इराक में तिकरित से अगवा की गयीं सभी 46 भारतीय नर्से सुरक्षित स्वदेश लौट आयी हैं. भारत सरकार और इराक के पड़ोसी देशों की मदद से इन्हें सुन्नी चरमपंथी संगठन इसलामिक स्टेट ऑफ इराक एंड द लेवेंट (आइएसआइएल) के आतंकवादियों से रिहा कराया गया है. शुक्रवार को चरमपंथियों ने नर्सो को कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी इरबिल स्थित एयरपोर्ट पर छोड़ दिया.
यहां से एयर इंडिया के विशेष विमान से उन्हें सुरक्षित भारत लाया गया. शनिवार सुबह ये सभी नर्से अपने गृह नगर केरल पहुंच जायेंगी. केरल के मुख्यमंत्री ओम्मन चांडी ने बीबीसी तमिल सेवा के जय कुमार से बातचीत में कहा कि एयर इंडिया का एक विशेष विमान नर्सो को लेने के लिए शुक्रवार शाम को नयी दिल्ली से रवाना हुआ. सभी नर्से शनिवार सुबह सात बजे केरल पहुंच जायेंगी. सद्दाम हुसैन के गृह नगर तिकरित के एक अस्पताल में काम करनेवाली ये सभी नर्से केरल की रहनेवाली हैं.
गुरुवार को चरमपंथी इन्हें तिकरित से मोसुल ले गये थे. इसके बाद से नर्सो के परिजनों की चिंता बढ़ गयी थी. लेकिन, शुक्रवार की सुबह एक नर्स ने अपने परिजन को एसएमएस किया कि चरमपंथी उन्हें मोसुल से 70 किलोमीटर दूर स्थित इरबिल एयरपोर्ट ले जा रहे हैं. वे उन्हें वहां रिहा कर देंगे. नर्सो ने परिजनों को यह भी खबर दी कि चरमपंथियों ने उनके साथ कोई बदसलूकी नहीं की. वे सभी सुरक्षित हैं. चांडी ने कहा कि केंद्र हरसंभव प्रयास कर रहा है. वह इराक में फंसे भारतीयों को निकालने के मुद्दे पर भारतीय राजनयिकों से लगातार जानकारी ले रहे हैं. उन्होंने इससे पहले कहा था कि विदेश मंत्रलय और भारतीय दूतावास के अधिकारी लक्ष्य हासिल करने के लिए ‘ईमानदारी से प्रयास’ कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने गुरुवार को केरल के मंत्री रमेश चेन्नीथला, केएम मणि और एम अली के साथ दो बार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से मुलाकात की थी और संकट के हल के लिए विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की.
परिजनों में खुशी की लहर
नर्सो की रिहाई की खबर से उनके परिजन खुश हैं. एक नर्स श्रुति की मां शोभा शशिकुमार ने बताया कि उनकी बेटी ने गुरुवार देर रात को उन्हें फोन किया. उसने बताया कि वे लोग रात करीब 11 बजे (भारतीय समयानुसार) मोसुल पहुंचीं. उन्हें एक पुराने भवन में रखा गया है. वहां बिजली की सुविधा नहीं है. लेकिन, चरमपंथियों का व्यवहार दोस्ताना है.
इससे पहले गुरुवार को खबर आयी थी कि आतंकवादियों ने तिकरित के उस अस्पताल को बम विस्फोट कर उड़ा दिया है, जिसमें भारतीय नर्सो ने शरण ले रखी थी. इसमें पांच भारतीय नर्सो के घायल होने की भी खबर थी. इसी दौरान यह भी खबर थी कि एक नर्स ने मैसेज भेजा है कि भारत सरकार उनकी रिहाई के लिए शिद्दत से प्रयास नहीं कर रही. लगता है उनकी हत्या के बाद सरकार पर्याप्त संख्या में उनके लिए कॉफीन भेजेगी. लेकिन, इसके एक दिन बाद ही सभी को सुरक्षित रिहा करा लिया गया.
इंतजार कर रहा था भारतीय
अधिकारियों का दल तिकरित छोड़ने को बाध्य हुई 46 भारतीय नर्से इर्बिल पहुंचीं, तो भारतीय अधिकारियों का एक दल वहां उनका इंतजार कर रहा था. अधिकारियों ने उन्हें एयर इंडिया के विशेष विमान में बैठा कर कोच्चि के लिए रवाना कर दिया.
ऐसे संभव हुई रिहाई
भारत सरकार ने इराक सरकार के साथ ईरान और सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों में बसे प्रभावशाली भारतीय नागरिकों से संपर्क किया. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने खाड़ी देशों के राजनीतिज्ञों से बात की और इस संकट को हल करने में उनकी मदद मांगी. तब जाकर नर्सो की सुरक्षित रिहाई संभव हो सकी.
अब भी बड़ी संख्या में फंसे हैं भारतीय
इराक में सरकारी सैन्यबलों और अल कायदा समर्थित सुन्नी आंतकवादियों के बीच गंभीर संघर्ष छिड़ने से पहले वहां करीब 10 हजार भारतीय थे. आतंकवादियों ने दो महत्वपूर्ण शहरों पर कब्जा कर लिया है और वे बगदाद की ओर बढ़ रहे हैं. 10 जून को छिड़े इस संघर्ष के चलते हजारों इराकी विस्थापित हो गये हैं. बड़ी संख्या में भारतीय अब भी वहां फंसे हुए हैं.
अब अगवा 39 लोगों को छुड़ाने की बारी
नर्सो की रिहाई भारत सरकार के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत है. अब सरकार के एजेंडे में उन 39 लोगों को छुड़ाना होगा, जिन्हें चरमपंथियों ने अगवा कर रखा है. सरकार को उम्मीद है कि वह इन्हें भी जल्द ही भारत लाने में कामयाब होगी.
