नयी दिल्ली : 27 फरवरी 1931 इलाहाबाद का एलफेड पार्क गोलियों की आवाज से गूंज रहा था. चंद्र शेखर आजाद को चारों तरफ से अंग्रेजों ने घेर लिया था. किसी अपने ने ही उन्हें गद्दारी की थी. आजाद के यहां होने की खबर अंग्रेजों तक पहुंचायी और आजाद घिर गये. यहां भी आजाद लड़ते रहे पीछे नहीं हटेजब अंतिम गोली बची तो उन्होंने खुद को गोली मार ली. अंग्रेजों में आजाद का खौफ इतना था कि उनके शहीद होने के बाद भी उनके पास कोई जाने की हिम्मत नहीं कर रहा था.
आजाद का यह त्याग देश हमेंशा याद रखेगा. 1920 में 14 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर आजाद गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़े. आजादी के आंदोलन के दौरान वह गिरफ्तार हुए, तो उन्होंने अपना नाम आजाद पिता का स्वतंत्रता और जेल का अपना पता बताया था.
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा, देश की स्वतंत्रता पर अपना सर्वस्व अर्पण करने वाले, अमर शहीद #ChandrashekharAzad को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन. आपके विचारों ने युवाओं को क्रांति की सच्ची परिभाषा समझा कर उनका मार्गदर्शन किया था. मातृभूमि के प्रति आपका प्रेम व समर्पण युगों-युगों तक स्मरण किया जाता रहेगा.
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऑफिशियल सीएमओ अकाउंट से लिखा गया, देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले भारत माता के वीर सपूत अमर शहीद #ChandrashekharAzad जी के बलिदान दिवस पर कोटि-कोटि नमन.
