लड़ाकू विमान को विकसित करने में देरी पर संसदीय समिति चिंतित

नयी दिल्ली :देश में हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) को विकसित करने एवं इसे बेड़े में शामिल करने में भारी विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि भारतीय वायु सेना की अवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिये एलसीए के विकास में तेजी लायी जाए और देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित […]

नयी दिल्ली :देश में हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) को विकसित करने एवं इसे बेड़े में शामिल करने में भारी विलंब पर चिंता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि भारतीय वायु सेना की अवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिये एलसीए के विकास में तेजी लायी जाए और देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जाए .

लोकसभा में शुक्रवार को पेश हल्के समाघात वाहन का डिजाइन, विकास, विनिर्माण और अधिष्ठापन विषय पर लोक लेखा समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि एलसीए विकसित करने और इसे बेडे़ में शामिल करने में भारी विलंब के कारण दो एलसीए स्क्वाड्रनों को तैयार नहीं किया जा सका. भारतीय वायु सेना को 20,037 करोड़ रूपये की लागत से मिग बीआईएस, मिग 29, मिराज 2000 और जगुआर विमानों का उन्नयन कराना पड़ा तथा मिग 21 को हटाने के कार्य को संशोधित करना पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वायु सेना 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृत संख्या की तुलना में 35 स्क्वाड्रन के साथ कार्य कर रही है और उसमें से मिग 21 और मिग 27 विमान के स्क्वाड्रन अगले 10 वर्षों में रिटायर हो जायेंगे .
समिति यह नोट करके निराश है कि अपेक्षित संख्या में विमान उपलब्ध कराने में विफल हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड/एयरोनाटिकल डेवेलपमेंट एजेंसी और रक्षा मंत्रालय की विफलता ने भारतीय वायुसेना की लड़ाकू क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है जिससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है . समिति अत्यधिक चिंता के साथ नोट करती है कि विमानन क्षेत्र में अनुसंधान और विकास की कमी के कारण देश को विदेशों से लड़ाकू और सिविल दोनों तरह के विमान खरीदने के लिये हजारों करोड़ रूपये खर्च करने पड़ेंगे .
समिति ने कहा है कि भारतीय वायु सेना की आवश्यक्ताओं को पूरा करने के लिये एलसीए के विकास में तेजी लायी जा सके और देश की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की जा सके . समिति ने यह भी कहा कि परियोजना में विलंब पर लेखा परीक्षा और रक्षा संबंधी स्थायी समिति द्वारा बार बार की गई टिप्पणियों के बावजूद स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ है .

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