अब बजट सत्र में ‘ट्रिपल तलाक’ बिल को पास कराने की कोशिश करेगी सरकार
नयी दिल्ली : सरकार विवादास्पद तीन तलाक विधेयक को अब बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पारित कराने का प्रयास करेगी. सरकार का कहना है कि वह इस विधेयक के लिए प्रतिबद्ध है. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने शीतकालीन सत्र के समापन पर कांग्रेस पर निशाना साधा. कांग्रेस ने लोकसभा में इस विधेयक का […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नयी दिल्ली : सरकार विवादास्पद तीन तलाक विधेयक को अब बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पारित कराने का प्रयास करेगी. सरकार का कहना है कि वह इस विधेयक के लिए प्रतिबद्ध है. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने शीतकालीन सत्र के समापन पर कांग्रेस पर निशाना साधा. कांग्रेस ने लोकसभा में इस विधेयक का विरोध नहीं किया था लेकिन उच्च सदन में इसका विरोध किया. कुमार ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी महिला सशक्तीकरण के बारे में बात करते है लेकिन जब इसको मूर्त रुप दिये जाने की बात आती है तो वह भाग जाते है.
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यसभा में कांग्रेस हर दिन विधेयक को लटकाने के लिए एक बहाने के साथ आयी. कुमार ने कहा कि हालांकि सरकार विधेयक को पारित कराने और हमारी मुस्लिम बहनों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. एक बार में तीन तलाक को फौजदारी अपराध बनाने वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2017 के तहत दोषी मुस्लिम पुरुषो को तीन वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है.
इस विधेयक को 28 दिसंबर को लोकसभा में पारित किया जा चुका है. किंतु राज्यसभा में विपक्ष द्वारा इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग पर अड़ जाने के कारण इसे पारित नहीं किया जा सका. जब 29 जनवरी को बजट सत्र की शुरुआत होगी तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा द्वारा पेश किये गये प्रस्ताव को विचार-विमर्श के लिए लाया जायेगा. सरकार के सूत्रों ने बताया कि वे बजट सत्र के पहले चरण में कोई रास्ता निकालेंगे और किसी आम सहमति पर पहुंचने के लिए विपक्ष के साथ वार्ता की जायेगी.
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सरकार बजट सत्र के लिए कार्यक्रम की एक सूची तैयार कर रही है. इसमें इस मुद्दे को लेकर एक अध्यादेश लाये जाने की संभावना नहीं है और अगले सत्र में विधेयक को पारित कराने का प्रयास किया जायेगा. कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा था कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद एक साथ तीन तलाक की परिपाटी जारी है और इसलिए सरकार के लिए यह जरुरी था कि वह इसके लिए कानून लेकर आये.