शहर के बरगंडा सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में वर्ष 1935 से मां की पूजा हो रही है. उस समय आसपास पूजा नहीं होती थी. बीच में उसरी नदी पड़ने के बाद भी सिहोडीह, सिरसिया सहित कई गांव के लोग यहां नदी पार कर आते थे और पूजा में सामूहिक रूप से भाग लेते थे. बताया गया कि यहां पूजा करने और पूजा के लिए अस्थायी पंडाल का निर्माण करने को लेकर कई गांव के लोगों की बैठक सामूहिक रूप से की गयी थी. पहले तिरपाल लगाकर मां की पूजा की जाने लगी. इसके बाद लोगों में मां के प्रति आस्था बढ़ती गयी और यहां पूजा के अवसर पर पंडाल बनाने की याेजना बनायी गयी. आपसी सहयोग से राशि इकट्ठा की गयी. इसके बाद यहां पंडाल का निर्माण करने के साथ ही 10 दिवसीय पूजा शुरू की गयी. इसके लिए कमेटी गठित की जाती है, ताकि पूजा का आयोजन बिना रुकावट होता रहे. यहां पूजा के दौरान प्रतिदिन आरती, पूजन और प्रसाद वितरण के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाने लगा.
अगलगी की घटना के बाद किया गया था स्थायी निर्माण
वर्ष 2000 में यहां पूजा को लेकर पंडाल का निर्माण किया जा रहा था. निर्माण लगभग पूरा हो चुका था, कि इसी दौरान शार्ट सर्किट के कारण यहां आग लग गयी. इससे पूरा पंडाल ही जलकर खाक हो गया. पूजा का आयोजन लगभग नजदीक ही था, इस कारण यहां पूजा कमेटी की बैठक हुई. इसमें फिर से पंडाल निर्माण का निर्णय लिया गया. इसके बाद तेज गति से पंडाल का निर्माण शुरू किया गया और कुछ ही घंटे में पंडाल का पुनर्निर्माण करा लिया गया. इसके बाद विधिवत रूप से पूजा की गयी. पूजा के बाद यहां बैठक कर इस बात का निर्णय लिया गया कि यहां स्थायी रूप से मंडप निर्माण का निर्णय लिया गया. कुछ ही दिनों में इसका काम पूरा कर लिया गया. र्गा मंदिर के बगल में सबों की सहमति से भगवान शिव और माता पार्वती का मंदिर बनाया गया था. इसलिए इसे विश्वनाथ मंदिर भी कहा जाने लगा.कमेटी है सक्रिय
कमेटी में अध्यक्ष अजय बगेड़िया,सचिव प्रदीप अग्रवाल हैं, उपाध्यक्ष दुर्गा राम चंद्रवंशी और विश्वनाथ शर्मा के अलावा नवीन कुमार सिन्हा, महेश शर्मा, रवि राज, मनोज संघई, जवाहर केसरी, पवन संघई, किशुन साव, मनाेज अग्रवाल आयोजन में सक्रिय हैं.
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