आदिम जनजाति बिरहोर परिवार की उपासी कुमारी सभी मिथक को तोड़ कर इंटर के बाद स्नातक की पढ़ाई शुरू कर रही है. बिरहोर परिवारों में खासकर लड़कियों के लिए उच्चतर शिक्षा सबसे बड़ी चुनौती है. इस समुदाय में लड़कियों को पांचवीं, छठी पढ़ने बाद घर में बैठा दिया जाता है या तो समय से पहले शादी करवा दी जाती है. वहीं, लड़कों की बात की जाये तो उन्हें कमाने या फिर रस्सी बुनने के काम में लगा दिया जाता है.इसलिए अटका के बुढ़ाचांच के बिरहोर परिवारों में से कोई भी लड़का-लड़की आज तक कोई कॉलेज नहीं पहुंचा. लेकिन, इस धारणा को टोले के उपासी कुमारी पिता अंबुलाल बिरहोर ने तोड़ते हुए कॉलेज की चौखट तक जा पहुंची है. वह आइएएस बनना चाहती है.
टोले की आबादी है 325
बुढ़ाचांच में बिरहोरटंडा की आबादी 325 हैं. यहां के बच्चे पांचवीं तक ही पढ़ते हैं. इन सबके बीचउपासी बिरहोर ने न सिर्फ दसवीं की परीक्षा पास की, बल्कि इंटर करने के बाद अब ग्रेजुएशन के लिए बगोदर के घाघरा साइंस कॉलेज में एडमिशन कराया है. वह हिंदी विषय से ग्रेजुएशन करेगी. 26 सितंबर से उपासी कॉलेज जाना शुरू करेगी. उपासी ने बताया कि बिरहोर समुदाय में लड़कियों को विशेष रूप से उच्च शिक्षा प्राप्त करने में काफी कठिनाई है.
मां ने किया सहयोग
कहा कि मां संजीना देवी ने पढ़ाई में काफी सहयोग किया. हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय से मैट्रिक और इंटर तक की पढ़ाई करवायी. मैट्रिक और इंटर में प्रथम श्रेणी से पास भी की. पढ़ाई के प्रति ललक को देखते हुए घाघरा साइंस कॉलेज में एडमिशन करवाया. चार भाई- बहनों में वह सबसे बड़ी है.
काफी खुशी है : संजीना
वहीं, उपासी बिरहोर की मां संजीना देवी कहती हैं कि बेटी ने स्कूल से मेहनत करते हुए अब कॉलेज तक जा रही है. इससे काफी खुश है. कई लोगों का इसमें सहयोग भी मिला है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि बेटी की आगे की पढ़ाई के साथ अच्छी नौकरी हो. नौकरी के अभाव के कारण अपने बच्चों को मजदूरी के लिए भेज दिया जाता है.
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