जमुई . बिहार सरकार ने 17 सितंबर से दो अक्तूबर तक स्वस्थ नारी सशक्त परिवार नामक अभियान शुरू किया है. इसी बीच दशहरे की छुट्टियां पड़ रही हैं. विभाग के अनुसार, इस अभियान की माॅनिटरिंग प्रत्येक दिन वीसी के माध्यम से राज्य मुख्यालय से की जा रही है, जिसमें प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित विशेष कैंपों एवं स्वास्थ्य केंद्रों से दी जाने वाली सुविधाओं व गतिविधियों का प्रतिवेदन देते हैं. लेकिन इस दौरान स्वास्थ्यकर्मी अपनी छुट्टियों को लेकर ऊहापोह की स्थिति में हैं. स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि जब ये सारे स्वास्थ्य संबंधी सुविधा रूटीन रूप में क्षेत्र के लाभुकों को मिलता ही है. इस संबंध में बिहार स्वास्थ्य सेवाएं कर्मचारी संघ के प्रदेश महासचिव मो जावेद अख्तर ने कहा इन छुट्टियों का इंतजार स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ उनके परिजनों को भी रहता है. फिर स्वास्थ्य विभाग में बड़ी संख्या में महिला कर्मी भी काम करती हैं जिनको नवरात्र के दौरान फलाहार पर रहते हुए सुबह-शाम पाठ भी करना होता है. फिर जब कोई भूकंप, बाढ़, सुनामी, कोविड जैसी महामारी की आपातकालीन स्थिति नहीं है तो फिर रूटीन सुविधा जो वर्ष भर जनता के लिए सुलभ हैं, उसको लेकर पर्व के समय अभियान चलाना और सभी तरह की छुट्टियों को रद्द करना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि अमानवीय भी है.फिलहाल कर्मियों के इस आक्रोश को लेकर सरकार व विभाग को सूचना दे दी गयी है. संघ ने अपनी ओर से घोषणा कर दी है कि जब कोई आपातकालीन स्थिति नहीं है तो कर्मी सरकार द्वारा घोषित छुट्टियों का उपभोग कर सकते हैं. किसी भी दंडात्मक कार्रवाई की स्थिति में संघ कर्मी के साथ है. दूसरी ओर विभाग के फरमान और संघ के आह्वान के बीच स्वास्थ्यकर्मियों में ऊहापोह की स्थिति हो गई है. अनुशासन के नाम पर छोटे कर्मी कुछ बोलने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन छुट्टियों में घर जाने के नाम पर उनकी कातर आंखें सबकुछ बयां कर रही हैं.
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