प्रसिद्ध व पौराणिक है अयोध्यागंज बाजार का वैष्णोदेवी दुर्गा मंदिर

प्रसिद्ध व पौराणिक है अयोध्यागंज बाजार का वैष्णोदेवी दुर्गा मंदिर

कुरसेला अयोध्यागंज बाजार स्थित पौराणिक वैष्णो देवी दुर्गा मंदिर नवरात्र पूजा पर सजधज कर तैयार हो चुका है. मंदिर की भव्यता साज सज्जा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है. दुर्गा सप्तशती के पाठ प्रवचनों व घंटा ध्वनि के गूंज से आसपास का वातवरण भक्तिमय हो उठा है. बड़े तोरणद्वार के साथ पहुंच पथों को रंगबिरेंगे लरियों से सज्जा की गयी है. नवरात्र पर सुबह से रात तक मंदिर में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी है. दुर्गा मंदिर की स्थापना वर्ष 1927 में हुई थी मंदिर का स्थापना कुरसेला स्टेट के रघुवंश नारायण सिंह ने वर्ष 1927 में किया था. स्टेट परिवार के लोगों द्वारा कई सालों तक प्रतिमा का स्थापन कर दुर्गा पूजा मनाया जाता रहा. कुरसेला स्टेट के रायबहादुर रघुवंश नारायण सिंह खुद भगवती दुर्गा के डोली को कंधा दिया करते थे. उस समय मनोकामना पूर्ण होने पर प्रसाद के साथ मंदिर के प्रांगण में बकरे की बलि भी चढ़ाई जाती थी. अयोध्यागंज का प्रमुख मंदिर होने से बाजार सहित आसपास लोगों का मंदिर से आस्था जुड़ा हुआ था. गुजरते वक्त में स्टेट परिवार ने मंदिर को पूजा के लिए बाजार के लोगों के हवाले कर दिया. अयोध्यागंज बाजार के जनसमुदाय के हवाले मंदिर का जिम्मा आने से इसके पूजा आयोजन में बदलाव आया. सार्वजनिक निर्णय से मंदिर में बलि प्रथा बंद कर आस्था स्वरुप मेंं वैष्णोदेवी दुर्गा मंदिर का नाम दिया. बलि के नाम पर श्रद्धालु यंहां नारियल का चढ़ावा चढ़ाने लगे. कहते हैं कि आस्था विश्वास से मंदिर में कामना करने वाले श्रद्धालुओं की हर मुरादें पुरी होती आयी है. सार्वजनिक रूप से मंदिर का जिम्मा मिलने से वर्ष 1995 में लाखों के राशि से मंदिर का जीर्णोद्वार किया गया. उस समय से मंदिर का भव्यता निरंतर विकास की ओर उन्मूख है. जनमानस के बढ़ते आस्था ने वैष्णोदेवी मंदिर को क्षेत्र का प्रसिद्ध मंदिर बना दिया है. मंदिर में होता है विशेष आयोजन वैष्णो देवी दुर्गा मंदिर में प्रतिवर्ष की भांति इस साल भी नवरात्र पर धर्म आस्था व भक्ति भावना पर अधारित विशेष आयोजन रखा गया है. प्रतिदिन संध्या पर महाआरती, दीप दान, बिल्वा निमंत्रण, नव पत्रिका प्रवेश, महाअष्टमी पूजन व्रत, निशा पूजन, डाला भराई, देवी जागरण, कुवांरी कन्या भोजन, देवीश्रंगार पूजन, महाप्रसाद वितरण, हवण पूजन, अपराजिता पूजा, कलश जल प्रवाह आदि कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है. कलश स्थापन के प्रथम दिन से भागवत कथा का वाचन आयोजन मे शामिल है. इन कार्यक्रमों के आलावा भक्ति भावना पर अधारित स्थानीय कलाकारों का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां शामिल है.

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By RAJKISHOR K

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