महागामा प्रखंड क्षेत्र में पेयजल की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है. क्षेत्र के कई पंचायतों में लगाये गये चापाकल धीरे-धीरे जमींदोज हो रहे हैं. बड़ी संख्या में चापाकल खराब होकर वर्षों से अनुपयोगी पड़े हैं. ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार विभाग को इसकी जानकारी दी, लेकिन मरम्मत का कार्य केवल कागजों तक सीमित रहा. पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज़ जाना पड़ता है, जिससे महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक परेशान हैं. खासकर गर्मी और बारिश के मौसम में पानी की किल्लत और बढ़ जाती है. कई स्थानों पर लोग मवेशियों के लिए भी गंदे तालाब या कुओं का पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग चापानलों की मरम्मत और रख-रखाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है. सिर्फ कागजी कार्रवाई पूरी की जाती है, जबकि जमीन पर कोई कार्य नहीं हो रहा. परिणामस्वरूप हजारों की आबादी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है. ग्रामीणों ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि वे शीघ्र खराब चापानलों की मरम्मत करवायें और नये चापानल स्थापित कर लोगों को पेयजल की समस्या से निजात दिलायें.
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