भगवती मंदिर में भक्तों की मन्नतें होती हैं पूरी, नवरात्र में विशेष महत्व

भगवती मंदिर में भक्तों की मन्नतें होती हैं पूरी, नवरात्र में विशेष महत्व

102 वर्ष पुराना है मंदिर का इतिहास स्वप्न से प्रेरित होकर रंका की रानी ने मंदिर की स्थापना की थी गढ़वा नवरात्रि विशेष:-3 नंद कुमार, रंका रंकागढ़ परिसर स्थित ऐतिहासिक भगवती मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. शारदीय नवरात्र में इस मंदिर का विशेष महत्व होता है. पूरे नवरात्र भर यहां पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि मां भगवती के दरबार में मांगी गयी मन्नत अवश्य पूरी होती है. मंदिर का इतिहास लगभग 102 वर्ष पुराना है. बताया जाता है कि रंका राज की रानी मानिक राज देवी मां भगवती की अनन्य भक्त थीं. एक दिन उन्हें स्वप्न में माता का दर्शन हुआ और उसी में किले के बायें भाग में मंदिर की स्थापना का संकेत मिला. स्वप्न से प्रेरित होकर रानी ने मंदिर की स्थापना करवायी. तब से प्रतिदिन यहां नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. नवमी को दी जाती है बलिहर शाम ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि के बीच भगवती की महाआरती की जाती है. पौराणिक परंपरा के अनुसार शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि को मां भगवती को खस्सी की बलि दी जाती है. यह परंपरा धीरे-धीरे प्रचलित हुई और आज भी जारी है. बलि शाही परिवार के सदस्य शाही तलवार से विधि-विधान के साथ करते हैं. खस्सी का शीश मां के चरणों में अर्पित कर विशेष पूजा की जाती है. पड़ोसी राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालुनवरात्र के अवसर पर झारखंड के अलावा बिहार और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. राजा कुमार गोवर्धन प्रसाद सिंह ने बताया कि नवरात्र में मंदिर में कलश स्थापना कर मां का पाठ किया जाता है. पूरे नवरात्र सोलह बतियों का संयुक्त घी का दीपक और सोलह प्रकार के पुष्प अर्पित किये जाते हैं.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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