नाथनगर. गोलदारपट्टी में चल रही रामलीला के पांचवें दिन बुधवार को कलाकारों ने ताड़का वध व अहल्या उद्धार की लीला का मंचन किया. मंच पर राक्षसों का आतंक व परेशान ऋषि-मुनि के दृश्य की बेहतर प्रस्तुत किया गया. ताड़का वध प्रसंग में राक्षसों के आतंक से ऋषि-मुनि परेशान रहते हैं. लगातार उनके यज्ञ को राक्षस भंग कर देते हैं. इसी समय गुरु विश्वामित्र यज्ञ को सफल बनाने व राक्षसों के विनाश के लिए अयोध्या के राजा दशरथ के पास जाते हैं और उनसे उनके दो पुत्र राम और लक्ष्मण को मांगते हैं. भारी मन से राजा दशरथ अपने दोनों पुत्रों को ऋषि को सौंप देते हैं. गुरु विश्वामित्र दोनों कुमारों को लेकर सीधे वन चले जाते हैं और वहां अपना यज्ञ आरंभ करते हैं. राक्षस फिर यज्ञ को विफल करने का प्रयास करते हैं. तभी राम व लक्ष्मण ताड़का नाम की विकराल राक्षसी का वध कर देते हैं. ताड़का वध होते ही गुरु शांतिपूर्ण यज्ञ को संपन्न करते हैं. मंच पर इस दृश्य के बाद राजा जनक की पुत्री के विवाह को लेकर उनके मंत्री गुरु विश्वामित्र को आमंत्रण भेजते हैं. आमंत्रण को स्वीकार कर गुरु विश्वामित्र भगवान राम व लक्ष्मण को लेकर जनकपुरी के लिए प्रस्थान करते हैं. रास्ते में गौतम ऋषि का आश्रम मिलता है, जिसके सामने एक पत्थर की मूर्ति के रूप में गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या दिखायी पड़ती हैं. भगवान राम इस शिला के बारे में गुरु से पूछते हैं. गुरु अहल्या की कहानी विस्तार से बताते हैं. वे कहते हैं कि जबतक वह स्वयं इस पत्थर को अपने पैरों से नहीं छू देते तब तक इस पत्थर के रूप में स्थापित अहल्या का उद्धार नहीं होगा. यह सुनकर राम कहते हैं कि वह क्षत्रिय हैं और अपने पैरों से किसी नारी का अपमान नहीं कर सकते. विश्वामित्र राम को समझाते हैं कि जब तक वह शिला को अपने पैरों की अनुभूति नहीं करायेगा, तब तक अहिल्या का उद्धार नहीं होगा. यह जानकर भगवान श्रीराम शिला के ऊपर पैर रखकर अहल्या का उद्धार करते हैं.
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