जहानाबाद. दुर्गा पूजा की तैयारी जोर पकड़ रही है. पूजा-पंडालों का निर्माण अंतिम चरण में है. जिला मुख्यालय सहित जिले के विभिन्न प्रखंड मुख्यालय और बाजारों में जगह-जगह बड़ी अट्टालिकाओं की तरह पंडालों का निर्माण कराया जा रहा है. पूजा पंडालो के आगे तोरण द्वार बनाए जा रहे हैं. पंडालो और तोरण द्वार में विभिन्न प्रकार की सजावट की जा रही है. रोलेक्स, झालर, मरकरी और एलईडी बल्ब से पंडाल और तोरण द्वार को सजाया जा रहा है जिसमें जगह-जगह एलईडी बल्ब से बने चक्र, फूल तथा कई तरह के डिजाइन के कट आउट लगाये जा रहे हैं. पंडाल और तोरण द्वार पर कहीं मंदिर का स्ट्रक्चर बनाया जा रहा है, तो कहीं कलश का. पूजा-पंडालों के साथ-साथ पूरे शहर के सड़कों की सजावट की जा रही है. पूजा-पंडालों से शुरू होकर बहुत दूर तक सड़कों पर सजावट का काम चल रहा है. सड़क के दोनों ओर यह सड़क के डिवाइडर के बीच रोशनी के लिए मरकरी लगाई जा रही हैं. इसके अलावा सड़कों के दोनों तरफ एलईडी बल्ब के झालर तथा रंग-बिरंगी रोशनियों के बल्ब लगाये जा रहे हैं. हालांकि अभी माहा सप्तमी को आने में कुछ दिन दूर है, बावजूद इसके अभी से शाम होते ही पूरा शहर जगमगाने लगता है.
शहर के विभिन्न पूजा-पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण पूर्ण हो चुका है. अब प्रतिमाओं की सात सज्जा का काम भी अंतिम चरण में है. प्रतिमाओं को वस्त्र और आभूषण पहनाए जा रहे हैं. उनके सिर पर बड़े-बड़े मुकुट पहनाया जा रहे हैं. मां दुर्गा लक्ष्मी और सरस्वती के अलावा भगवान गणेश और कार्तिक के हाथों को विभिन्न अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित किया जा रहा है. 22 सितंबर को आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को दुर्गा पूजा के लिए कलश की स्थापना कर दुर्गा पाठ शुरू हो चुका है. शहर में दरधा जमुना संगम स्थित ठाकुरबाड़ी में सबसे बड़ी देवी जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है. यही दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा समारोह का आयोजन भी होता है. ठाकुरबाड़ी के मैदान में दुर्गा पूजा का मेला लगता है जिसमें जिले भर के श्रद्धालु आकर मां दुर्गा का दर्शन करते हैं और मेले में घूम कर दशहरा पर्व का आनंद लेते हैं. ठाकुरबाड़ी में मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण पूरा हो चुका है. कलाकार उसकी सजावट करने में लगे हैं. तीनों देवियों और भगवान की प्रतिमाओं को वस्त्र और आभूषण पहनाने तथा साज सज्जा का काम अंतिम चरण में है. शहर में ठाकुरबारी के अलावा सब्जी मंडी, सटी पर, पंचमहला, शास्त्री नगर, मलहचक मोड, ऊंटा मोड, काको मोड़, रेलवे स्टेशन कॉलोनी, पानी टंकी, अरवल मोड, काली मंदिर, नया टोला, लाल मंदिर, राजा बाजार और कोर्ट एरिया में बड़े परमेन पर प्रतिमा की स्थापना कर धूमधाम से दुर्गा पूजा मनाया जाता है.
इनमें से अधिकांश जगहों पर पूजा स्थल पर ही मूर्ति का निर्माण किया जाता है. कहीं- कहीं बाहर से प्रतिमा लाकर उसकी स्थापना की जाती है. जिन जगहों पर पूजा स्थल पर प्रतिमा का निर्माण होता है वहां प्रतिमा का निर्माण पूर्ण हो चुका है. अब सजावट का काम किया जा रहा है. 27 सितंबर तक प्रतिमा को सजाने और वस्त्र तथा आभूषण पहनने का काम पूरा कर लिया जाना है. जिन जगहों पर बाहर से प्रतिमा मंगायी जाती है वहां एक दो दिन में प्रतिमा मांगा ली जायेगी. 28 सितंबर यानी रविवार को महा सप्तमी के अवसर पर देवी पट खुल जायेगा. देवी पूजा स्थल के आसपास पूजा-पंडालों का निर्माण भी लगभग पूर्ण हो चुका है. उसमें भी सजावट जोर-शोर से की जा रही है.
उधर मलहचक मोड़ स्थित विभिन्न मूर्तिकारों के यहां भी मां दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण पूर्ण हो चुका है. मलहचक मोड़ और उसके आसपास कई मूर्तिकार रहते हैं जो दुर्गा पूजा, लक्ष्मी पूजा, सरस्वती पूजा, गणेश चतुर्दशी, विश्वकर्मा पूजा, होलिका दहन के लिए होलिका और प्रह्लाद की मूर्तियां आदि का निर्माण करते हैं. इन कलाकारों से जिले भर के श्रद्धालु प्रतिमाओं की खरीद कर उन्हें अपने-अपने पूजा स्थलों पर स्थापित कर पूजा-अर्चना करते हैं. इन कलाकारों के पास भी मूर्तियां निर्माण का काम पूरा हो चुका है. मूर्तियों पर साज सज्जा का काम किया जा रहा है. इन कलाकारों के यहां श्रद्धालु एक महीना पूर्व आकर अपनी मूर्ति की रूपरेखा आदि बताकर पहले से ही मूर्ति निर्माण का ठेका उन कलाकारों को दे देते हैं. इसके बाद वे कलाकार उसी अनुरूप मूर्तिका निर्माण शुरू कर देते हैं. इन कलाकारों के यहां श्रद्धालु अपनी-अपनी मूर्तियों को देखने आ रहे हैं. इस जगह से एक-दो दिन में मूर्तियां अपने गंतव्य स्थान की ओर रवाना हो जाएगी. उधर ठाकुरबाड़ी में मेला की तैयारी जोरों पर है. ठाकुरबाड़ी के मैदान में मेला के लिए विभिन्न प्रकार की अस्थाई दुकानों का निर्माण किया जा रहा है जिसमें फूल-माला प्रसाद बेचने वाले दुकानों के अलावा बच्चों के लिए खिलौने महिलाओं के लिए श्रृंगार और परचून की दुकानों के अलावा मिठाई और चाट एवं फास्ट फूड की दुकानें भी खोली जा रही हैं. बच्चों और महिलाओं के झूलने के लिए तरह-तरह के झूले लगाये जा रहे हैं. ठाकुरबाड़ी-गौरक्षणी पुलिया के टूटने से श्रद्धालुओं को हो रही परेशानी : शहर के ठाकुरबाड़ी में दरधा जमुना संगम तट पर शहरी क्षेत्र और गौरक्षणी को जोड़ने वाली पुलिया के टूटने से इस वर्ष श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गौरक्षणी में प्रसिद्ध महामुंडेश्वरी देवी मंदिर है, जहां आम दिनों में भी भक्तगण दूर-दूर से दर्शन करने के लिए आते हैं. लग्न के समय बड़े पैमाने पर यहां शादी ब्याह का आयोजन चलता है. दुर्गा पूजा के अवसर पर भी यहां ठाकुरबाड़ी के बाद भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ लगती है. ठाकुरबाड़ी में बड़ी देवी जी के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालु निश्चित रूप से गोरक्षनी में मा मुंडेश्वरी माता के दर्शन के लिए भी जाते हैं. इस साल गौरक्षणी और ठाकुरबाड़ी के बीच नदी पर बनी पुलिया को प्रशासन के द्वारा तोड़ दिए जाने के कारण श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण प्रशासन द्वारा कुछ महीने पहले इसे तोड़ दिया गया था. अब भक्तों को गौरक्षणी देवी मंदिर जाने के लिए खान बहादुर रोड होते हुए जाफरगंज पुलिया को पार करना पड़ रहा है. श्रद्धालु ठाकुरबाड़ी से खान बहादुर रोड पहुंचते हैं, जहां जाफरगंज पुलिया को पार कर फिर घूम कर गौरक्षणी मंदिर को पहुंच पा रहे हैं. इससे उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है और भारी परेशानी हो रही है. श्रद्धालुओं ने एक महीना पहले ही प्रशासन से अस्थायी तौर पर पैदल पुलिया निर्माण कराने की मांग की थी लेकिन प्रशासन ने श्रद्धालुओं की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
