सिमडेगा. ठेठईटांगर विवाह मंडप भवन में ग्रामसभा मंच की दो दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई. अध्यक्षता समर्पण सुरीन ने की. इसमें मुख्य रूप से विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, जिप सदस्य अजय एक्का, अनूप लकड़ा उपस्थित थे. विधायक ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 है, जो ब्रिटिश काल में आदिवासी अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों की जमीनों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाया गया था. इस अधिनियम के तहत आदिवासी भूमि को गैर आदिवासियों को बेचने या हस्तांतरित करने पर रोक है. साथ ही समान समुदाय के लोगों को भी जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही भूमि खरीद-बिक्री की अनुमति है. यह अधिनियम उत्तरी छोटानागपुर, दक्षिणी छोटानागपुर और पलामू मंडलों में आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों की जमीन की सुरक्षा व संरक्षण के लिए लाया गया था. इस कानून में यह प्रावधान है कि कोई व्यवसायी या गैर आदिवासी आदिवासी की जमीन अपने हित के लिए नहीं खरीद सकता. समान जाति या समुदाय के आदिवासी लोग आपस में जमीन खरीद सकते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होती है. सीएनटी एक्ट के तहत जमीन को छह साल से अधिक समय तक लीज पर नहीं दिया जा सकता है और लीज पर व्यावसायिक काम करने की अनुमति नहीं है. अधिनियम का मुख्य उद्देश्य आदिवासी और स्वामित्व की रक्षा करना है. इसका उद्देश्य भूमि संबंधी धोखाधड़ी को रोकना और यह सुनिश्चित करना था कि आदिवासी समुदाय अपनी भूमि से वंचित न हो. जिप सदस्य अजय एक्का ने कहा कि ग्रामसभा कानूनी रूप से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243 ए के तहत परिभाषित एक स्थायी निकाय है. यह ग्राम स्तर पर एक कानूनी संस्था है, जिसके सभी मतदाता सदस्य होते हैं और इसे राज्य विधानमंडल द्वारा सौंपी गयी शक्तियों और कार्यों का पालन करना होता है. अनूप लकड़ा ने कहा कि पेसा कानून आदिवासी समुदायों को ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन का अधिकार देता है, ताकि वह अपनी परंपराओं, भूमि, संसाधनों और विकास से संबंधित निर्णय खुद ले सकें. मौके पर नेलसन केरकेट्टा, प्रमुख बिपिन पंकज मिंज, सुचित बागे, रजनी बागे, विंसेंट कुल्लू, श्याम सिंह, सूरज सिंह, प्रदीप सिंह, सुशील एक्का, मनोहर जोजो, सरस्वती देवी, सीपीरियन समद, अजहर कुल्लू, बेंजामिन डुंगडुंग, बीरबल बड़ाइक, जॉनसन डांग, जोहान बारला, बिक्रम बरवा, प्रकाश केरकेट्टा, कलिंदर प्रधान आदि उपस्थित थे.
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