रांची. बैंक अधिकारियों से मिलीभगत कर एक व्यक्ति के खाते से 2.56 करोड़ रुपये के बेनाम लेन-देन और उसके खाते में लोन का जमा 25.85 लाख रुपये हड़पने के मामले की प्रारंभिक जांच पूरी हो गयी है. अनुसंधानकर्ता ने अपनी रिपोर्ट सीआइडी मुख्यालय को भेजी है. इसमें कहा गया है कि जांच में आवेदक दुर्गा प्रसाद गुप्ता द्वारा लगाये गये आरोपों के कुछ बिंदु सत्य प्रतीत होते हैं. प्रथम दृष्ट्या आरोपी रवींद्र कुमार दोषी प्रतीत होते हैं. चूंकि प्रारंभ में आवेदक और उनके भाई नथ्थु प्रसाद गुप्ता का संयुक्त व्यवसाय चलता था. नथ्थु प्रसाद गुप्ता का बेटा रवींद्र कुमार बालू और कोयला के कारोबार से जुड़ा है. रवींद्र ने सुनियोजित तरीके से चाचा दुर्गा प्रसाद गुप्ता के खाता में उनके मोबाइल नंबर की जगह अपना मोबाइल नंबर जोड़वा लिया. फिर बैंक ऑफ इंडिया टंडवा शाखा के तत्कालीन प्रबंधक मनोज कुमार से साठगांठ कर उक्त खाता का एक बार में चार चेक वॉल्यूम जारी करवा लिया. इसके बाद चाचा के हस्ताक्षर से मिलता-जुलता चेक पर हस्ताक्षर कर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया जाना प्रतीत होता है. इस घटनाक्रम में तत्कालीन शाखा प्रबंधक टंडवा मनोज कुमार का आचरण भी संदिग्ध प्रतीत होता है. आवेदक और रवींद्र कुमार के बीच की समस्याओं को सुलझाने और आवश्यक कार्रवाई करने में तत्कालीन टंडवा थाना प्रभारी विजय कुमार की भी भूमिका निष्पक्ष और न्यायपूर्ण प्रतीत नहीं होती है. दुर्गा प्रसाद गुप्ता के आवेदन में लगाये गये आरोपों की पूर्ण सत्यता को सिद्ध करने के लिये दोनों के हस्ताक्षरों का मिलान और जांच कराये जाने की आवश्यकता है. श्री गुप्ता ने मामले में शिकायत की थी. आरोप लगाया था कि रवींद्र कुमार बालू व कोयला के कारोबार से जुड़े हैं. उनका टंडवा थाना से अच्छा संबंध रहा है. जिससे तत्कालीन टंडवा थाना प्रभारी विजय कुमार सिंह द्वारा इनके विरुद्ध दिये गये आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं कर मुझे और मेरे बेटे को रवींद्र की बाइक चोरी करने के झूठे आरोप में फंसाकर जेल भेजा गया. वहीं रवींद्र के खिलाफ शिकायत मिलने पर मुझे और परिवार को प्रताड़ित किया गया. जांच के बाद अनुसंधानकर्ता ने रवींद्र कुमार गुप्ता का बयान लिया. उन्होंने कहा कि दुर्गा प्रसाद गुप्ता द्वारा लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद हैं. उन्होंने विवाद का कारण अपने पिता नथ्थु प्रसाद गुप्ता और चाचा दुर्गा प्रसाद गुप्ता के बीच संपत्ति का बंटवारा बताया है.
बैंक के शाखा प्रबंधक ने दिया लिखित जवाब
जांच के दौरान बैंक ऑफ इंडिया शाखा टंडवा के वर्तमान शाखा प्रबंधक प्रणत कुमार ने अनुसंधानकर्ता को लिखित जवाब दिया. कहा कि 27 सितंबर 2014 को एक साथ चार चेक वॉल्यूम संख्या 651 से 801 तक जारी किया गया. लेकिन चेक वॉल्यूम जारी करने संबंधी आवेदक का कोई आवेदन शाखा में उपलब्ध नहीं है. हालांकि आवेदक का हस्ताक्षर उक्त चेक में पाया गया है. बैंक की ओर से 27 सितंबर 2014 के बाद जितनी भी लेन-देन की गयी है, उसकी प्रति सीआइडी को सौंपी गयी है. वहीं यह भी कहा गया है कि नौ फरवरी 2021 को आवेदक के खाते से किसी भी प्रकार का लेन-देन नहीं किया गया है. इससे जुड़ा दस्तावेज शाखा में उपलब्ध नहीं है. जिस वक्त उक्त खाता से लेन-देन हुआ था, उस समय मनोज कुमार बैंक ऑफ इंडिया टंडवा शाखा के प्रबंधक थे.
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