बेतिया. सदर अंचल कार्यालय में 52 लाख 91 हजार 807 से ज्यादा राशि का हेराफेरी की गई है. इसका खुलासा ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद हुआ है. ऐसे में तत्कालीन सीओ रघुवीर प्रसाद, श्यामाकांत प्रसाद व नाजीर मंजीत आंनद की मुश्किलें बढ़ सकती है. इसको लेकर वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय के उपनिदेशक मनोज कुमार ने आवश्यक कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट भेजा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2020-021 की अवधी का अंचल कार्यालय बेतिया का ऑडिट वरीय अंकेक्षक आशुतोष कुमार अनुपम, संतोष कुमार,सहायक अंकेक्षण पदाधिकारी (प्रशिक्षु) सरदार गुरप्रीत सिंह, प्रियंका कुमारी, प्रशिक्षु अंकेक्षक रुबी कुमारी ने किया है. जिसमें शीर्ष 2245 (सहाय्य) में कुल 52 लाख 91 हजार 807 का व्यय विभिन्न में मदों में दिखाया गया है, लेकिन व्यय से संबंधित व्यय प्रमाणक के रूप में संबंधित अभिश्रव ऑडिट में सहयोग कर रहे सीओ राघवेंद्र राघवन व नाजीर हिफजुर रहमान ने अंकेक्षण दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया. इस संबंध में अंकेक्षण दल द्वारा आपत्ति भी निर्गत किया गया. संबंधित अभिश्रव व अन्य अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा गया इसके बावजूद निर्गत आपत्ति का कोई जवाब नहीं दिया गया. संबंधित अभिश्रव व अन्य अभिलेख अंकेक्षण दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया. ऐसे में ऑडिटरों ने सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि का इतने लंबे समय बित जाने के पश्चात भी व्यय से संबंधित अभिश्रव व अन्य अभिलेख कार्यालय के पास नहीं होना अथवा अंकेक्षण के दौरान अंकेक्षण दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाना किये गये कुल रू 5291807 के व्यय को संदिग्ध बनाता है. संबंधित पदाधिकारी व कर्मी के प्रशासनिक अक्षमता एवं कर्तव्य के प्रति लापरवाही को इंगित करता है. ———— रोकड़ में दिखाया खर्च, पर प्रस्तुत नहीं किया साक्ष्य ऑडिट के दौरान यह भी बात सामने आई वित्तीय वर्ष 2020-21 में सदर अंचल कार्यालय व्यय के नाम पर रोकड़पुस्त में 1 लाख 43 हजार 834 रुपया व्यय दिखाया गया, लेकिन व्यय से संबंधित व्यय प्रमाणक के रूप में संबंधित अभिश्रव, भंडार पंजी व अन्य अभिलेख अंकेक्षण दल के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया. इतना ही नहीं वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रस्तुत किये गये रोकड़ पुस्त कुल 1 लाख 25 हजार 200 का व्यय दिखया गया है,लेकिन व्यय का प्रायोजन स्पष्ट नहीं किया गया व ना ही उसका साक्ष्य अंकेक्षण दल के सामने प्रस्तुत किया गया. ऐसे में अंकेक्षण दल नेव्यय को संदिग्ध बताया है. इसकी जांच कराने की बात कही गई है. ——- 1.96 लाख राशि होगी वसूल ऑडिट के दौरान यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में सैरात पिपड़ा पकड़ी बाजार की 1 लाख 81 हजार 500 में बंदोबस्ती किया गया था, लेकिन बंदोबस्ती की राशि, 6 फीसदी स्टांप शुल्क, 2 फीसदी निबंधन शुल्क की राशि के जमा करने में संबंधित साक्ष्य व रोकड़पुस्त में नहीं पाई गई है. इसको लेकर अंकेक्षण दल ने 1 लाख 96 हजार 020 की वसूली संबंधित सीओ व कर्मी से करने की बात कही है. उधर सदर सीओ राघवेंद्र राघवन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं होने के कारण उनकी प्रतिक्रिया नहीं ली जा सकी.
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