मां बनने की खुशी के बीच छिपा हो सकता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन, इन संकेतों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

नई मां हैं? हमेशा उदासी, घबराहट महसूस हो रही है? यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन हो सकता है. जानें इसके लक्षण और बचाव के तरीके.

Postpartum Depression: बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए खुशी का मौका होता है. लेकिन हर नई मां इस समय केवल खुश ही महसूस करे, ऐसा जरूरी नहीं है. कई महिलाओं को डिलीवरी के बाद लगातार उदासी, घबराहट, थकान या रोने जैसा महसूस होने लगता है. शुरुआत में लोग इसे सामान्य थकान या मूड स्विंग समझ लेते हैं, लेकिन अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) हो सकता है.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या होता है?

WHO के अनुसार, पोस्टपार्टम डिप्रेशन बच्चे के जन्म के बाद होने वाली एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है. यह किसी भी महिला को हो सकती है, चाहे वह पहली बार मां बनी हो या पहले भी बच्चे को जन्म दे चुकी हो.

डिलीवरी के बाद शरीर में हार्मोन तेजी से बदलते हैं. इसके अलावा नींद पूरी न होना, शारीरिक कमजोरी, मानसिक तनाव और नई जिम्मेदारियों का दबाव भी इस समस्या का कारण बन सकता है.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के प्रमुख लक्षण

अगर नीचे दिए गए लक्षण लगातार दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें.

  • हर समय उदास या खालीपन महसूस होना.
  • बिना किसी वजह बार-बार रोना.
  • पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि खत्म हो जाना.
  • बहुत ज्यादा चिंता या घबराहट होना.
  • नींद न आना या जरूरत से ज्यादा सोना.
  • भूख बहुत कम या बहुत ज्यादा लगना.
  • खुद को बेकार या दोषी महसूस करना.
  • बच्चे से भावनात्मक जुड़ाव महसूस न होना.
  • ध्यान लगाने या फैसला लेने में परेशानी होना.
  • खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या जैसे विचार आना.

क्या पोस्टपार्टम डिप्रेशन खतरनाक हो सकता है?

अगर समय पर इलाज न मिले, तो यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है. इससे मां की मानसिक और शारीरिक सेहत प्रभावित होती है. कई बार महिला बच्चे की ठीक से देखभाल नहीं कर पाती, जिससे बच्चे के विकास पर भी असर पड़ सकता है.

गंभीर मामलों में खुद को नुकसान पहुंचाने या बच्चे को नुकसान पहुंचाने जैसे खतरनाक विचार भी आ सकते हैं. इसलिए इस समस्या को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए.

किन महिलाओं में ज्यादा होता है खतरा?

कुछ महिलाओं में पोस्टपार्टम डिप्रेशन होने का जोखिम ज्यादा हो सकता है. जैसे-

  • पहले से डिप्रेशन या एंग्जायटी की समस्या होना.
  • गर्भावस्था के दौरान ज्यादा तनाव रहना.
  • परिवार का सहयोग कम मिलना.
  • आर्थिक या पारिवारिक परेशानियां होना.
  • पर्याप्त आराम और नींद न मिलना.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन से कैसे बचें?

कुछ आसान आदतें अपनाकर इस समस्या के खतरे को कम किया जा सकता है.

  • रोज पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें.
  • पौष्टिक और संतुलित भोजन करें.
  • हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि करें.
  • अपनी भावनाएं परिवार या दोस्तों से साझा करें.
  • जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच न करें.
  • लक्षण दिखने पर मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें.
  • बिना डॉक्टर की सलाह के कोई दवा न लें.

परिवार की भूमिका क्यों है जरूरी?

नई मां को इस समय सबसे ज्यादा जरूरत भावनात्मक सहारे की होती है. अगर परिवार को उनके व्यवहार में बदलाव दिखाई दे, तो उन्हें कमजोर या ज्यादा सोचने वाला कहने के बजाय उनकी बात ध्यान से सुनें.

समय पर सहयोग, प्यार और सही इलाज से पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बाहर निकलना आसान हो सकता है.

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