-हरिवंश-
28 मार्च को पटना के पत्रकारों को यह जान कर घोर अचंभा हुआ कि उन्हें राज्यपाल गोविंद नारायण सिंह ने पत्रकार सम्मेलन के लिए बुलाया है. आमतौर पर राज्यपाल पत्रकार सम्मेलन नहीं बुलाते. उन्होंने पत्रकारों से आरंभ में ही कहा कि ‘मैं आप लोगों से राजनीतिक उद्देश्य से नहीं मिल रहा हूं. इधर कुछ दिनों से विभिन्न अखबारों में राजभवन से संबंधित छप रहे समाचारों से जो चर्चा शुरू हुई है, मैंने सोचा कि आप लोगों को वास्तविकता बता हूं.’
राज्यपाल ने बताया कि राजभवन के कामकाज पर चौकसी एवं निगरानी के अभाव में यहां भ्रष्टाचार फलता-फूलता रहा. राजभवन से काफी बरतन (कुछ चांदी के भी), उपस्कर एवं अन्य सामान गायब हैं. राजभवन में आनेवाले सामान का कोई अभिलेख उपलब्ध न होने के चलते यह बता पाना कठिन है कि कितने सामान गायब हैं और कितने रुपयों के सामान बचे हैं.
राज्यपाल ने अपने प्रधान सचिव एआर एडीगे के लंबी छुट्टी पर चले जाने के रवैये पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि वह बिना उनकी पूर्वानुमति के अपने आका (गॉडफादर) मुख्य सचिव को सूचना दे कर छुट्टी पर चले गये. राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से एक ऐसे अधिकारी की सेवा मांगी है, जो मुख्य सचिव को अपना आका (गॉडफादर) नहीं माने.
राज्यपाल ने (जो बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी है) विश्वविद्यालयों की चर्चा करते हुए कहा कि ‘मैं सभी विश्वविद्यालयों का दौरा कर स्थिति का जायजा लूंगा और निजी रूप से छात्रों से संपर्क करूंगा.’ राज्यपाल ने पत्रकारों को यह भी बताया कि वह परंपराओं को ढोते रहने के हिमायती नहीं, वरन परंपरा व व्यवस्था को दुरुस्त कर चलने के हिमायती हैं.
गोविंद नारायण सिंह को अभी भी उम्मीद है कि उन्हें आलाकमान आगे चल कर मध्यप्रदेश की बागडोर थमा सकता है. इसके लिए राजनीतिक रूप से सक्रिय और खबरों में बने रहना उनके लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने किसी से कहा भी कि राजीव गांधी भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हैं, तो यह राजभवन में भी दिखाई पड़ना चाहिए. श्री सिंह ने 27 फरवरी को बिहार के पंद्रहवें राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला और अपनी मुहिम में सक्रिय हो गये.
आते ही उन्होंने राजभवन के कुछ लोगों के यहां तलाशी करायी. इस तलाशी में राजभवन के कुछ चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के घर से भी राजभवन से गायब कुछ सामान बरामद हुए. राज्यपाल ने तीन खानसामों एवं एक बेयरा की नौकरी को चपरासी के रूप में बदल दिया. इनमें से एक (सीताराम) हरिजन, दो (मजहरुल हक तथा शगीरुद्दीद) मुसलमान तथा एक (निर्मल रोजेरियो) ईसाई है.
विरोध और सुगबुगाहट के बावजूद भ्रष्टाचार एवं अव्यवस्था मिटाने की अपनी मुहिम पर राज्यपाल डटे हुए हैं. उन्होंने अपने पत्रकार सम्मेलन में साफ कहा कि उनकी ताकत को कम करके न आंका जाये. उन्हें राज्य विधानसभा को भंग करने और मुख्यमंत्री तक को बरखास्त करने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल के रूप में वह कई पुरानी परंपराओं को खत्म करने जा रहे हैं, ताकि आम लोगों से मिल सकें. राज्यपाल अब रोज राजभवन के बरामदे में तख्त पर आसन जमा कर आम लोगों, अधिकारियों, नेताओं और पत्रकारों से मिलते हैं. राज्यपाल की कार्यशैली और उनके बयान उन्हें पूरी तरह सक्रिय राजनेता बनाये हुए हैं.
राज्यपाल श्री सिंह के इन बयानों के बारे में जब मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद से उनके पत्रकार सम्मेलन में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि राज्यपाल से जुड़ी और उनके द्वारा कही गयी बातों के बारे में आप लोग राज्यपाल से ही पूछें, तो बेहतर.
