इस भागमभाग जिंदगी में महिलाओं ने खुद को इतना उलझा लिया है कि अपने स्वास्थ्य एवं शरीर पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे पातीं. जब आप स्वस्थ्य रहेंगी तभी परिवार की देखभाल भी कर पायेंगी.
यह सही है कि महिलाएं आज घर-बाहर की दोहरी जिम्मेवारी निभा रही हैं. वैसे मैंने देखा है कि स्वभावत: शांत और गंभीर दिखनेवाली ज्यादातर महिलाएं खुद को ऐसा बना लेती हैं मानो पूरे घर को देखने एवं संभालने का जिम्मा उन्हें पैदाइशी मिला हो. यही वजह है कि वे जिम्मेदारियों को इतनी गंभीरता से लेती हैं कि खुद को भी इग्नोर कर देती हैं.
दरअसल, लड़कियां बचपन से अपनी मां को देखते हुए बड़ी होती हैं. किस तरह से एक मां फैमिली के सभी सदस्यों के साथ काम करके सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाती है एवं सबके लिए कितना त्याग करती है, इसका प्रत्यक्ष असर उनकी जीवनशैली पर दिखने लगता है. महिलाओं को इस सोच से खुद को निकालना होगा कि पूरे घर की जिम्मेदारी को करने का कर्तव्य सिर्फ उसका ही है. पति या घर के बाकी पुरुष सदस्य भी घर के छोटे-छोटे कामों में हाथ बंटा सकते हैं.
इसी तरह बच्चों को भी शुरू से सिखाना चाहिए कि अपना-अपना काम खुद कर सकें. आप पति एवं बच्चे को यह एहसास होने दें कि घर के सभी सदस्य काम और आराम के लिए बराबर के भागीदार हैं. आज भले ही महिलाओं के प्रति पुरुषों के दृष्टिकोण में परिवर्तन आने लगा है, लेकिन बहुत कुछ बदलना बाकी है. आमतौर पर पति अपनी पत्नी को घर की मालकिन एवं साझेदार कहता जरूर है, लेकिन स्वीकारना नहीं चाहता. वह घर के कामों में हाथ बंटाना अपनी तौहीन समझता है. लेकिन इस स्थिति के लिए भी जिम्मेदार महिलाएं ही हैं, क्योंकि काम के सारे बोझ को उठा कर खुद को वे महान समझती हैं.
थोड़ी-सी वाहवाही से भावुक हो उठती हैं. पति ऑफिस से आता है, तो पूरा घर उसके खिदमत में जुट जाता है, मानो पहाड़ तोड़ कर आया हो. वहीं अगर महिला काम कर वापस आती है, तो थकी होने के बावजूद घर-रसोई एवं बच्चों के काम में लग जाती है. पति चाय की चुस्की लेता है और पत्नी घर के कामों में व्यस्त हो जाती है. विडंबना है कि किसी का ध्यान उस पर नहीं जाता जो दिन भर काम करके थकी रहती है चाहे वह गृहिणी हो या कामकाजी महिला.
कई महिलाओं से मैं सुनती हूं कि ”मैं खुद के लिए बहुत कुछ करना चाहती हूं, लेकिन समय नहीं मिलता.” यह सच है कि घर और बाहर की जिम्मेदारी छोड़ी नहीं जा सकती, लेकिन खुद पर इतना भी बोझ न डालें कि शरीर और मन काम करने लायक ही न रह जाये.
इन सबके पीछे यही वजह है कि इस भागमभाग जिंदगी में महिलाओं ने खुद को इतना उलझा लिया है कि अपने स्वास्थ्य एवं शरीर पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे पातीं. फलत: गलत आहार, अनियमित दिनचर्या एवं मानसिक तनाव कई शारीरिक रोगों से उन्हें ग्रसित कर देता है.
37 वर्षीया विवाहिता रूपाली ठाकुर अपनी समस्या लेकर मेरे पास आयीं. कहती हैं कि घर के कामों में पति रत्ती भर सहयोग नहीं देते. कहते हैं तुम घर की मालकिन हो, तुम्हारा घर, तुम्हारे बच्चे हैं, कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं. बच्चे शिकायत करते हैं कि मेरे दोस्तों की मम्मियां तरह-तरह के टिफिन देती हैं और तुम रोज घिसा-पिटा पराठा, ब्रेड-मक्खन दे देती हो. घर का काम, फिर ऑफिस के कामों में इतना थक जाती हूं कि खुद के लिए वक्त ही नहीं मिलता. फिर भी सब नाराज रहते हैं.
उनकी जैसी हैं लक्ष्मी. नौकरी पेशा लक्ष्मी को देख कर कोई कह ही नहीं सकता कि वह सिर्फ 34 साल की है. चेहरे पर कोई रौनक ही नहीं, शरीर का वजन बढ़ गया है. इसी उम्र में शूगर की मरीज हैं. चेहरे पर झुर्रियां दिखने लगी हैं. देख कर लगता है कि 50 साल की महिला है. वह कहती है, सारा दिन घर का काम, बच्चों की देख-रेख, पति की सेवा. खुद को देखने का समय ही नहीं मिल पाता.
याद रखें ये बातें
– प्रत्येक कार्य को करने के लिए समय निर्धारित करें और प्रयास करें कि आपका काम निर्धारित समय पर समाप्त हो जाये.
– खुद की रुचि-हुनर को पहचानें और उसे तराशें.
– यह कभी भी न सोंचे कि घर का प्रत्येक काम मुझे ही करना है. बच्चों की देख-रेख, किचन के कामों में पति एवं घर के अन्य सदस्यों का सहयोग लेने में संकोच न करें.
– कभी भी खुद के सैर-व्यायाम एवं खान-पान को नजरअंदाज न करें. आप स्वस्थ रहेंगी, तभी पूरा परिवार स्वस्थ रहेगा.
– योग, प्राणायाम को अपनाएं, ताकि मन-शरीर दोनों स्वस्थ एवं ऊर्जा से भरपूर लगे. तब आप 50 की उम्र में भी 30 की नजर आयेंगी. अगर सच में सब से प्यार करती हैं, तो पहले खुद से प्यार करना सीखें.
