गर्भवती महिलाएं हो जाएं सावधान! बच्चे में आटिज्म का खतरा बढ़ा रही हैं एंटी-डिप्रेशन दवाएं.

प्रेगनेंसी के दौरान अक्सर महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं. ऐसे में एंटी-डिप्रेशन की दवाएं लेना उनके बच्चे को आटिज्म का शिकार बना सकता है. हालिया हुए एक शोध से वैज्ञानिकों ने चेताया है कि ‘गर्भवती महिलाएं यदि एंटी डिप्रेशन दवाएं ले रही हैं तो उनके होने वाले बच्चे को आटिज्म होने का खतरा […]

प्रेगनेंसी के दौरान अक्सर महिलाएं डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं. ऐसे में एंटी-डिप्रेशन की दवाएं लेना उनके बच्चे को आटिज्म का शिकार बना सकता है. हालिया हुए एक शोध से वैज्ञानिकों ने चेताया है कि ‘गर्भवती महिलाएं यदि एंटी डिप्रेशन दवाएं ले रही हैं तो उनके होने वाले बच्चे को आटिज्म होने का खतरा बढ़ जाता है.’

इस शोध के मुताबिक, ऐसी महिलाएं जो अपनी गर्भावस्था अंतिम चरणों में यानी छटवें महीनें से एंटी डिप्रेशन अधिक लेना शुरू करती हैं उनके होने वाले बच्चे को 87% से अधिक आटिज्म होने का खतरा रहता है.

इनकी तुलना में जो महिलाएं अपनी गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में यानी शुरू के तीन माह डिप्रेशन के लिए दवाएं लेती हैं. उनके होने वाले बच्चे में इस खतरे को कम देखा गया है.

इस शोध के लिए 145,456 बच्चों और माओं का परिक्षण किया गया. जिनमें से 1,054 और 0.72 % वो माएं थी जिन्होंने अपनी गर्भावस्था के दौरान एंटी डिप्रेशन की दवा ली जिसकी वजह से उनके बच्चों में आटिज्म के लक्षण देखने को मिले.

विशेषज्ञों के अनुसार, एंटी डिप्रेशन दवाओं का असर धीरे-धीरे बच्चे के दिमाग पर असर करता है. जो उनके दिमाग की बनावट को प्रभावित करता है. इस बात का अभी पता लगाना बाकी है कि होने वाले बच्चों को इस पूर्वानुमान होने वाली बीमारी से कैसे निजात पाई जा सके.

विशेषज्ञों के अनुसार, एंटी डिप्रेशन की दवाएं दिमाग के सेरोटोनिन वाले क्षेत्र को प्रभावित करती हैं. जिसके कारण दिमाग का सम्पूर्ण विकास होने में बाधा उत्पन्न होती है.

यह शोध जामा पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

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